नई दिल्ली: भारतीय राजनीति के इतिहास में आज का दिन विशेष रूप से दर्ज किया जाएगा. 23 मई को प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में चुनकर सत्ता में आए नरेंद्र मोदी ने अपना चुनावी वादा पूरा करते हुए अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिलने वाले विशेष राज्य के दर्जे को खत्म कर दिया. इस तरह से कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर को लेकर जो चर्चाएं और अटकलें लगाई जा रही थीं उसपर पूरी तरह से विराम लग गया. अब जम्मू-कश्मीर दो राज्यों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बंट जाएगा. ये दोनों केंद्र शासित राज्य होंगे. यानी अब केंद्र शासित राज्यों की संख्या सात से बढ़कर नौ हो गई. बता दें कि विशेष राज्य का दर्जा खत्म होने के साथ ही जम्मू-कश्मीर अनुच्छेद 35 (A) भी समाप्त हो गया.
अनुच्छेद 370 हटने के अलावा आज क्या-क्या हुआ?
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल को आज गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में पेश किया. ये उच्च सदन से पास हो गया. इसके पक्ष में 125 वोट जबकि विपक्ष में 61 वोट पड़े. इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में 10 फीसदी आर्थिक आरक्षण बिल राज्यसभा से पास हो गया.
कैसे हुआ फैसला?
पिछले करीब 11 दिनों से मोदी सरकार कश्मीर को लेकर किसी बड़े फैसले की तरफ बढ़ रही थी. सबसे पहले 26 जुलाई को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल कश्मीर के दौरे पर गए, तभी कश्मीर को लैकर बड़े फैसले के संकेत मिले. 27 जुलाई को अतिरिक्त 100 कंपनियां भेजने का एलान हुआ. सरकार ने अमरनाथ यात्रा पर रोक लगा दी और सैलानियों को घाटी छोड़ने की हिदायत दी. 4 अगस्त को सूबे में काफी हलचल देखी गई और ये भी खबर आई कि मोदी सरकार कश्मीर को लेकर कैबिनेट बैठक करने वाली है. 4 और 5 अगस्त की रात जम्मू-कश्मीर में काफी हलचल रही.
महबूबा मुफ्ती और उमर अबदुल्ला जैसे नेता नजरबंद कर दिए गए, इंटरनेट सेवा ठप कर दी. घाटी के साथ-साथ जम्मू में भी धारा 144 लगा दी गई. 5 अगस्त यानी सोमवार को सुबह 9.30 बजे कैबिनेट की भी बैठक हुई तो भी किसी को कोई खबर नहीं थी कि फैसला क्या होने वाला है. कैबिनेट की बैठक से पहले पीएम आवास पर काफी हलचल रही. कानून मंत्री और गृह मंत्री सुबह 8.30 बजे ही पहुंच चुके थे. एनएसए अजित डोभाल और गृह सचिव राजीव गावा भी पीएम आवास पर थे. आखिरकार कैबिनेट की बैठक शुरू हुई. लेकिन किसी को कोई भनक नहीं थी कि फैसला क्या होने वाला है. डीटेल जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.
सरकार के फैसले के बाद अब क्या होगा?
पहले जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ था लेकिन अब ये खत्म हो गया है. यानी देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी पा सकता है. जम्मू-कश्मीर में वोट का अधिकार सिर्फ वहां के स्थाई नागरिकों को था, अब दूसरे राज्य के लोग यहां वोट कर सकेंगे. चुनाव में उम्मीदवार भी बन सकते हैं. देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी पा सकता है. स्कॉलरशिप हासिल कर सकता है. दूसरे राज्यों के लोग जम्मू कश्मीर में बिजनेस कर सकेंगे. राज्य की विधानसभा का कार्यकाल अब पांच साल का होगा, जो पहले छह साल का था. लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी, लेफ्टिनेंट गवर्नर होगा. डीटेल जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.
किसने किया विरोध और किसने किया समर्थन?
अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले का एआईएडीएमके, वाईएसआर कांग्रेस, बीजू जनता दल, अकाली दल, लोक जनशक्ति पार्टी समेत अन्य सहयोगी दलों ने एक सुर में समर्थन किया है. मायावती की बीएसपी ने अपना समर्थन दिया. इसके साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसका समर्थन किया. वहीं कांग्रेस, पीडीपी, सीपीआई, सीपीएम, डीएमके, आरजेडी और टीएमसी ने इसका विरोध किया. जेडीयू ने भी इसपर असहमति जताई. डीटेल जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.
क्या है विशेषज्ञों की राय?
संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा कि आर्टिकिल 370 पूरी तरह से खत्म हो गया है ये कहना बिल्कुल गलत होगा. आर्टिकिल 370 (1) बिल्कुल कायम है. ये संविधान का अंग है. क्लॉज दो और तीन को हटाया गया है. वहीं संविधान विशेषज्ञ डी के दुबे ने बताया, "धारा 370 को लेकर जो संशोधन आया है इसे 'संवैधानिक आदेश 272' कहा गया है. इसमें धारा 370 को खत्म नहीं किया है. ये 'क्लाज़ वन' के साथ जीवित रहेगी, लेकिन 'क्लाज़ टू और थ्री' को खत्म कर दिया गया है. भारत का संविधान वहां पर पूरा का पूरा लागू कर दिया गया है. डीटेल जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.
किसने क्या कहा?
बीजेपी के दिग्गज नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने सरकार के फैसले को देश के एकीकरण की दिशा में साहसिक कदम बताया. उन्होंने कहा कि अनुच्छेद को खत्म करना जानसंध के जमाने से ही बीजेपी की मूल विचारधारा का हिस्सा रही है. उन्होंने पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को बधाई दी. वहीं आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा, “सरकार के साहसपूर्ण कदम का हम हार्दिक अभिनंदन करते हैं. यह जम्मू-कश्मीर सहित पूरे देश के हित के लिए अत्यधिक आवश्यक था. सभी को अपने स्वार्थों एवं राजनीतिक भेदों से ऊपर उठकर इस पहल का स्वागत और समर्थन करना चाहिये.”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने सोमवार को दावा किया कि आज का दिन भारत के संवैधानिक इतिहास में एक 'काला दिन' है. महबूबा मुफ्ती ने कहा, ''इस फैसले का उपमहाद्वीप में भयावह परिणाम होंगे. भारत सरकार के इरादे स्पष्ट हैं. वे जम्मू-कश्मीर में वहां के लोगों को आतंकित कर के क्षेत्र पर अधिकार पाना चाहती है. कश्मीर में भारत अपना वादा निभाने में विफल रहा.''
फैसले के बाद सुरक्षा को लेकर कैसी तैयारियां?
केंद्र ने जम्मू-कश्मीर से संबंधित फैसलों के बाद सुरक्षा के किसी भी उल्लंघन को रोकने के वास्ते राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बोला है कि वे सुरक्षा बलों को अधिकतम सतर्क रहने को कहें. जम्मू शहर में सेना की छह टुकड़ी को तैनात किया गया. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में एहतियात बरतते हुए सैन्यकर्मियों की तैनाती की गयी है. अधिकारियों ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नागरिक प्रशासन की मदद के लिए जम्मू में सेना के टाइगर डिवीजन की छह टुकड़ी की तैनाती की गयी है. डीटेल जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.
कश्मीरी पंडितों ने क्या कहा? कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने पर वहां आतिशबाजी कर जश्न मनाया. स्थानीय संगठन "कश्मीरी समिति" के प्रमुख वीरेंद्र कौल ने कहा, "केंद्र सरकार ने हालात से निपटने की पुख्ता तैयारी के साथ जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर बहुत अच्छा कदम उठाया है. हम लोगों ने तो ऐसे किसी कदम की आस ही छोड़ दी थी." डीटेल जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.