NEET पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और सोनम वांगचुक का आंदोलन 24 दिनों से जारी है. 20 जुलाई 2026 को 'चलो संसद' मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस के साथ हुई झड़प, कांग्रेस का प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के ताजा ट्वीट ने इस मुद्दे को और गरम कर दिया है. आखिर क्या इस आंदोलन का कोई समाधान है और क्यों यह खत्म होता नहीं दिख रहा है...

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CJP आंदोलन का समाधान क्या है?

इस आंदोलन का समाधान उसी तरह निकल सकता है जैसे 2011 के अन्ना आंदोलन का निकला था, यानी बातचीत, रियायत और समझौता. हालांकि, 2026 की परिस्थितियां 2011 से बिल्कुल अलग हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस आंदोलन के समाधान के चार संभावित रास्ते हैं:

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1. संसद में चर्चा बनेगा सबसे सरल रास्ता

संसद के मानसून सत्र में NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा हो. कांग्रेस और CJP की मांग है कि इस मुद्दे पर संसद में बहस हो और सरकार जवाबदेही तय करे. सोनम वांगचुक ने साफ कहा है कि अगर संसद में इस मुद्दे पर चर्चा होती है, तो वे अपना अनशन खत्म कर सकते हैं. संसदीय कार्यवाही के नियमों के तहत, विपक्ष नियम 193 के तहत इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव ला सकता है, जिससे सरकार को बहस के लिए समय देना अनिवार्य हो जाता है. 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक और 2020 में गलवान घाटी की घटना पर भी इसी तरह संसद में चर्चा की गई थी.

2. NEET पेपर लीक की स्वतंत्र जांच

अगर सरकार CBI या SIT जांच की घोषणा कर दे, तो आंदोलनकारियों को एक बड़ी राहत मिल सकती है. इस मामले में अब तक हरियाणा, उत्तराखंड, बिहार और गुजरात पुलिस अलग-अलग जांच कर रही हैं. इससे कई बार विरोधाभासी जानकारियां सामने आई हैं. CJP की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक हाई लेवल SIT बनाई जाए, जिसमें CBI, ED और साइबर एक्सपर्ट शामिल हों. इसके पीछे तर्क यह है कि NEET पेपर लीक सिर्फ एक राज्य का नहीं, बल्कि एक अंतरराज्यीय संगठित अपराध है. इसमें कई राज्यों के शिक्षा माफिया और अधिकारी शामिल हो सकते हैं.

2024 में व्यापम घोटाले की जांच जिस तरह CBI ने की थी और 2,000 से ज्यादा लोगों को दोषी ठहराया गया था, CJP उसी तर्ज पर जांच की मांग कर रहा है. अगर सरकार सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली SIT गठित करने पर राजी हो जाती है, तो यह आंदोलन की दूसरी सबसे बड़ी जीत होगी.

3. केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा

CJP की सबसे बड़ी मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पद से इस्तीफा दें. यह सबसे मुश्किल है, क्योंकि सरकार ने साफ कर दिया है कि वह मंत्री को नहीं हटाएगी. संसदीय परंपरा के मुताबिक, मंत्री तभी इस्तीफा देता है जब या तो उसकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है या फिर प्रधानमंत्री खुद उससे इस्तीफा मांगते हैं.

2013 में रेल मंत्री पवन बंसल और कानून मंत्री अश्विनी कुमार को घोटाले के आरोपों में इस्तीफा देना पड़ा था. लेकिन मौजूदा सरकार के पास लोकसभा में पूर्ण बहुमत है और NDA के सहयोगी दल भी इस मुद्दे पर सरकार के साथ खड़े हैं. ऐसे में, सिर्फ आंदोलन के दबाव में मंत्री का इस्तीफा मांगना एक कठिन राजनीतिक लड़ाई है. हालांकि, CJP का तर्क है कि जब लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हो और पेपर लीक की घटनाएं लगातार हो रही हों, तो मंत्री की नैतिक जिम्मेदारी बनती है. फिलहाल, यह मांग आंदोलन की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.

4. छात्रों को मुआवजा और सुरक्षा

CJP ने आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपए मुआवजे की मांग की है. अगर सरकार इस पर सहमत हो जाती है, तो आंदोलन को कुछ हद तक शांत किया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NEET पेपर लीक और उसके बाद की मानसिक उथल-पुथल की वजह से अब तक 7 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं. इनमें राजस्थान के कोटा में 4, महाराष्ट्र के नागपुर में 1, बिहार के पटना में 1 और मध्य प्रदेश के इंदौर में 1 छात्र शामिल है. इन छात्रों की उम्र 17 से 21 साल के बीच थी.

CJP का कहना है कि सरकार को मृतकों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपए का मुआवजा तुरंत देना चाहिए. इसके अलावा, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का स्टूडेंट मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन और काउंसलिंग सिस्टम बनाने की मांग भी की गई है. सरकार ने अभी तक इस मांग पर कोई जवाब नहीं दिया है, लेकिन अगर वह मुआवजे की घोषणा कर देती है, तो आंदोलनकारियों के गुस्से को कम किया जा सकता है और बातचीत का रास्ता खुल सकता है.

क्यों अभी आंदोलन खत्म नहीं होता दिख रहा है?  

आंदोलन खत्म न होने की तीन बड़ी वजहें हैं:

  • सरकार की जिद: सरकार ने बातचीत से इनकार कर दिया है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने CJP को 'आतंकवादियों की B-टीम' कहा था. प्रधानमंत्री मोदी ने धर्मेंद्र प्रधान को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं. यह साफ संकेत है कि सरकार इस्तीफा नहीं देगी.
  • CJP भी अड़ी: CJP ने साफ कर दिया है कि वह बिना मांग पूरी हुए आंदोलन खत्म नहीं करेगा. CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा, 'आज खत्म नहीं होगा प्रदर्शन.' सोनम वांगचुक ने कहा, 'जब तक हमें संसद में सांसदों से मिलने की इजाजत नहीं मिलती, मैं अपना अनशन जारी रखूंगा.'
  • कांग्रेस का समर्थन: कांग्रेस के इस आंदोलन में आने से यह और गरम हो गया है. राहुल गांधी ने PM आवास के बाहर धरना देकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की है. इससे विपक्ष और सरकार के बीच की खाई और चौड़ी हो गई है.

इस मामले पर धर्मेंद्र प्रधान ने X पर बयान जारी करते हुए राहुल गांधी पर आरोप लगा दिए. उन्होंने कहा, 'विपक्ष ने लोकतांत्रिक बहस के बजाय राजनीतिक प्रदर्शन का रास्ता चुना है. उनके मुताबिक छात्रों को न्याय दिलाने की बजाय राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है. देश के युवाओं को नारेबाजी नहीं, बल्कि साफ जवाब, सुधार और जवाबदेही चाहिए.'

तो फिर कब खत्म होगा आंदोलन?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह आंदोलन तब तक खत्म नहीं होगा जब तक सरकार बातचीत के लिए तैयार नहीं होती. अन्ना आंदोलन में सरकार ने बातचीत की थी, इसलिए वह कामयाब हुआ. लेकिन यहां सरकार ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी मांग पर विचार नहीं करेगी. यह आंदोलन लंबा खिंच सकता है. अगर कांग्रेस इसे अपना राजनीतिक मुद्दा बना लेती है, तो यह 2027 के चुनाव तक जारी रह सकता है.'

पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई कहते हैं, 'सोनम वांगचुक और CJP का आंदोलन अब कंट्रोल से बाहर होता दिख रहा है. पुलिस लाठीचार्ज ने इसे और भड़का दिया है. अगर सरकार अब भी बातचीत नहीं करती है, तो यह आंदोलन और भी ज्यादा हिंसक हो सकता है. लेकिन सरकार की मजबूती यह है कि उसके पास संसद में बहुमत है और विपक्ष पूरी तरह से एकजुट नहीं है.'

पॉलिटिकल एक्सपर्ट और इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ तिवारी के मुताबिक, 'इस आंदोलन का समाधान सिर्फ बातचीत से हो सकता है. NEET पेपर लीक एक गंभीर मुद्दा है और सरकार को इसे 'राजनीति' नहीं मानना चाहिए. अगर सरकार NEET पेपर लीक की CBI जांच की घोषणा कर दे, तो आंदोलन को शांत किया जा सकता है. लेकिन मंत्री का इस्तीफा एक सियासी फैसला है, जो सरकार नहीं लेगी.'

एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार को NEET पेपर लीक की स्वतंत्र जांच के आदेश देना चाहिए. इससे छात्रों को न्याय मिलेगा और आंदोलन खत्म हो सकता है. सरकार को इस आंदोलन को गंभीरता से लेना चाहिए. फिलहाल यह आंदोलन खत्म होता नहीं दिख रहा है.