बताया जाता है कि बैठक में जब व्हाट्सएप सीईओ ने रविशंकर प्रसाद के आगे बैंकिंग क्षेत्र में उतरने और पेमेंट गेटवे सर्विस शुरू करने की योजना पर भी बात की. हालांकि प्रसाद ने उन्हें बताया कि इस बारे में मंत्रालय अपनी राय रिज़र्व बैंक को पहले ही भेज चुका है. सरकार का यह मत है कि व्हाट्सएप के ज़रिए पैसों के लेनदेन की सुविधा तभी दी जा सकती है जब कम्पनी अपना वित्तीय डेटा भारत में रखने को राजी हो. साथ ही एक भारतीय कॉरपोरेट कंपनी बने ताकि ज़रूरत पड़ने पर भारत के कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा सके. जिसके पहले भारत की शिकायत के बाद ही व्हाट्सएप ने उपभोक्ताओं के लिए मैसेज फॉरवार्ड पर एक बार में अधिकतम 5 उपभोक्ताओं की सीमा तय की थी. इतना ही नहीं कंपनी भारत में एक शीर्ष पद पर नियुक्ति की कवायद भी शुरू कर चुकी है. भारत आए क्रिस डेनियल्स ने मंत्री को सरकार की तरफ से रखी चिंताओं पर कार्रवाई का भरोसा तो दिलाया. मगर सरकार आगे पत्ते खोलने से पहले अपनी सभी तीन मांगों के पूरा होने का इंतज़ार कर रही है. ज़ाहिर है की आपराधिक घटनाओं के बहाने व्हाट्सएप को अधिक जवाबदेही के दायरे में लाने के पीछे चिंता 2019 के चुनावों में इसके सियासी इस्तेमाल पर नियंत्रण की भी है. यह भी पढ़ें-सत्यपाल मलिक J&K और लालजी टंडन बिहार के नए राज्यपाल बने
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