लोकसभा में बुधवार (12 अगस्त 2026) को मॉनसून सत्र के दौरान FCRA संशोधन बिल पेश किया गया. इस बिल को गृह मंत्री अमित शाह की जगह गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने सदन में पेश किया. बिल पेश होते ही विपक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया और इसे वापस लेने की मांग की. सरकार ने इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव भी रखा है. सरकार का कहना है कि इस पर JPC में विस्तार से चर्चा की जा सकती है और विपक्ष के सदस्य भी अपने सुझाव दे सकते हैं.

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कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने बिल को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यह विधेयक पहले गृह मंत्री अमित शाह के नाम से लिस्टेड था, लेकिन सदन में इसे गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने पेश किया. वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार को यह बिल वापस लेना चाहिए. कांग्रेस ने इस विधेयक को JPC में भेजे जाने के तरीके और इसकी जरूरत को लेकर भी सवाल उठाए.

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विपक्ष की ही थी JPC की मांग-रिजिजू

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब दिया. उन्होंने कहा कि खुद कांग्रेस और कुछ दूसरे विपक्षी सांसदों ने मांग की थी कि महत्वपूर्ण विधेयकों को JPC के पास भेजा जाए.रिजिजू ने कहा कि अगर किसी सदस्य को बिल के किसी प्रावधान पर आपत्ति है तो वह JPC के सामने अपनी बात रख सकता है. वहां विधेयक के हर हिस्से पर चर्चा और सुझाव देने का मौका मिलेगा.

अल्पसंख्यकों के खिलाफ प्रावधान दिखाने की चुनौती

किरेन रिजिजू ने FCRA बिल को लेकर विपक्ष के आरोपों पर भी सवाल उठाया. उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा कि वह बिल का कोई एक ऐसा प्रावधान दिखाएं, जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो.रिजिजू ने कहा कि विपक्ष को अगर बिल के किसी हिस्से पर आपत्ति है तो वह JPC में अपनी बात रख सकता है. FCRA बिल को लेकर DMK ने भी विरोध जताया है. पार्टी ने सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग की.

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