Lok Sabha Elections 2024: चुनावी माहौल के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें पुलिस की मौजूदगी में कुछ महिलाएं इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) तोड़ते हुए नजर आईं. यूजर्स ने इस क्लिप को लेकर दावा किया कि मतदाता जब दूसरी पार्टियों को वोट डाल रहे थे, तब मशीन से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नाम वाली एक पर्ची निकल आई थी. यही वजह रही कि पोलिंग बूथ पर इसके बाद महिलाओं ने ईवीएम में तोड़फोड़ की. औरतों को शक था कि ईवीएम में टैंपरिंग की गई है.


एक्स (पूर्व में टि्वटर) पर @Abhimanyu1305 नाम के हैंडल से 30 सेकेंड्स की क्लिप शेयर की गई, जिसमें बोलिंग बूथ के भीतर कुछ औरतों नाराज होते और भड़कते हुए नजर आईं. पुलिस की मौजूदगी में उनमें से एक ने ईवीएम को दो-तीन बार उठाकर जमीन पर पटका भी था. वीडियो शेयर करने वाले यूजर ने कैप्शन में लिखा था- महिलाओं ने ईवीएम मशीनें तोड़ीं. कोई भी बटन दबाने पर कमल (बीजेपी का चुनाव चिह्न) ही 'खिल' रहा था. चुनाव आयोग के प्रवक्ता और चुनाव आयोग, जागो अब या सोते ही रहना है?






मणिपुर में हुई थी Proxy Voting! 


हालांकि, 'फैक्ट क्रेसेंडो' ने जब इस दावे की पड़ताल की तो कहानी कुछ और ही निकली. फैक्ट चेकिंग वेबसाइट ने गूगल रिवर्स इमेज सर्च की तब एक ऐसा ही वीडियो पाया गया, जो कि 19 अप्रैल 2024 को अंग्रेजी चैनल 'एनडीटीवी' ने एक्स पर शेयर किया था. यह घटना नॉर्थ ईस्ट के मणिपुर में पोलिंग बूथ पर तब हुई जब एक से अधिक बार प्रॉक्सी वोटिंग (एक व्यक्ति की ओर से दूसरे के लिए डाला गया मत) का शक जताया गया था. 


हिंसा की घटनाएं आई थीं सामने


अंग्रेजी अखबार 'दि इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल 2024 को संपन्न हुआ था. मणिपुर के अलग-अलग हिस्सों से उस दिन वोटिंग के दौरान छिटपुट हिंसा की घटनाओं से जुड़ी खबरें आई थीं, जबकि कुछ जगहों पर बूथ कैप्चरिंग के भी प्रयास किए गए थे. यहां तक कि स्थानीयों ने शिकायत की थी कि उन पर बीजेपी के लिए वोट डालने का दबाव बनाया गया था.


फैक्ट क्रेसेंडो ने पड़ताल में क्या पाया?


एनडीटीवी की खबर में बताया गया था कि एक जगह पर फायरिंग भी हुई थी, जिसमें चार लोग जख्मी हुए थे. इस बीच, समाचार एजेंसी एएनआई ने एक्स पर एक पोस्ट किया था, जिसमें चुनाव आयोग का नोटिस शेयर करते हुए बताया गया था कि मणिपुर में 11 पोलिंग बूथों पर फिर से मतदान होगा. ऐसे में वायरल वीडियो के साथ किया गया दावा भ्रामक पाया गया. वायरल वीडियो का ईवीएम टैंपरिंग (छेड़छाड़) से कोई लेना-देना नहीं था. 


Disclaimer: This story was originally published by Fact Crescendo and republished by ABP Live Hindi as part of the Shakti Collective.