BJP Vs Rahul Gandhi on Indian Economic Tsunami: भारत के Economy Development को लेकर नए आंकड़े सामने आए हैं. अब इसपर भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक परफॉर्मेंस को लेकर नई बहस छिड़ गई है. बीजेपी विपक्ष को आर्थिक विकास दर के आंकड़े को जारी कर उसे अपने डिफेंस में इस्तेमाल कर रही है, तो वहीं, विपक्ष के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आर्थिक सुनामी की  भविष्यवाणी करते हुए सरकार को निशाने पर लिया है. गृहमंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी के दावों पर प्रतिक्रिया दी है. 

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गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि पीएम नरेंद्र के द्वारा शुरू किए गए दूरदर्शी आर्थिक सुधारों से देश में आर्थिक समृद्धि बढ़ रही है और भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है. ऐसे समय में जब दुनिया आर्थिक संकट से जूझ रही है, भारत की 7.7% की विकास दर — जो किसी भी अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्था से अधिक है — यह साबित करती है कि पिछले 12 वर्षों में हमारी अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत हुई है. महामारी हो या युद्ध, मोदी जी की दूरदर्शी नीतियां ही देश को हर चुनौती से सुरक्षित रूप से बाहर निकाल रही हैं.

वहीं बीजेपी के आईटी सेल चीफ अमित मालवीय ने कहा है कि भारत की एनुअल ग्रोथ रेट 7.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इससे भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है. बीजेपी का कहना है कि ये आंकड़े कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आशंकाओं को गलत साबित करते हैं. साथ ही देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत दर्शाती है. 

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हाल ही में जारी हुए आंकड़े बताते हैं कि पूरे फाइनेंशियल ईयर भारत की तिमाही ग्रोथ स्थिर रही है. ऐसे में इकॉनोमी चार तिमाहियों में बनी रही है. भारत की पहली तिमाही में ग्रोथ 6.7 प्रतिशत रही है. दूसरी तिमाही में 8.4 प्रतिशत और तीसरी और चौथी तिमाही में 7.8 प्रतिशत ग्रोथ दर्ज की गई है. 

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वैश्विक स्तर के आंकड़ों से बिल्कुल उलट हैं

वहीं, वैश्विक स्तर पर ये आंकड़े डेवलप मार्केट की धीमी ग्रोथ के बिल्कुल उलट है. जर्मनी में केवल 0.4 प्रतिशत, जापान में 0.8 प्रतिशत, यूरो क्षेत्र में 1.3 प्रतिशत और G7 देशों में औसतन 1.6 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई. भारत की ग्रोथ इंडोनेशिया, मलेशिया, मैक्सिको और थाईलैंड जैसे इमरजिंग मार्केट से भी बेहतर रही.

भारत की इकोनॉमी के मजबूत दावे को साबित करने के लिए मौजूदा इकॉनोमिक पॉलिसी के सपोर्टर्स कई डॉमेस्टिक सिग्नल का हवाला देते हैं. ऑटोमोबाइल की ब्रिकी अबतक के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई है.

वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी बनी हुई है. गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन में लगातार बढ़ोतरी, बैंक क्रेडिट में मजबूत ग्रोथ और विदेशी मुद्रा भंडार की अच्छी स्थिति से और बल मिलता है. समर्थकों का तर्क है कि ये आंकड़े मुश्किल में फंसी अर्थव्यवस्था के बजाय कॉर्पोरेट और कंज्यूमर के म्युचल ट्रस्ट को दिखाते हैं.

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