भारत ने एक ऐसी स्वदेशी एस-400 मिसाइल सिस्टम तैयार किया है, जो 400 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन के फाइटर जेट और टोही विमानों को मार गिरा सकती है. भारत की सबसे नई मिसाइल, जिसका नाम माता सीता के हथियार के नाम पर ‘कुशा’ दिया गया है, वही हथियार जिससे रावण भी कांपता था. रामायण में जिस तरह माता सीता ने घास यानी कुशा के एक तिनके के जरिए रावण को अपने करीब नहीं भटकने दिया था, ठीक वैसे ही भारत अब दुश्मन के हवाई हमलों से निपटने के लिए स्वदेशी एस-400 मिसाइल तैयार करने में जुट गया है.

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रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने गुरुवार (23 जुलाई, 2026) को लॉन्ग रेंज एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम कुशा का सफल परीक्षण किया. खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परीक्षण का वीडियो जारी कर दुनिया को इस उन्नत मिसाइल सिस्टम की जानकारी साझा की. क्योंकि इस मिसाइल के जरिए भारत, दुनिया के उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिससे दुश्मन को 400 किलोमीटर दूर पस्त किया जा सकता है.

S-400 के तर्ज पर DRDO ने तैयार किया ‘कुशा मिसाइल सिस्टम’

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कुशा मिसाइल के जरिए भारत, दुश्मन के फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइलों तक को देश की धरती पर गिरने और नुकसान पहुंचाने से पहले हवा में मार गिरा सकता है. रूस के एस-400 मिसाइल प्रणाली की तर्ज पर DRDO ने कुशा मिसाइल सिस्टम को तैयार किया है. 

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, माता सीता के पास ऐसी शक्ति थी कि वे दुश्मन को अपनी आंखों से भस्म कर सकती थीं, लेकिन अपने ससुर राजा दशरथ के कहने पर उन्होंने किसी को भी गुस्से से न देखने का प्रण लिया था. ऐसे में जब रावण अशोक वाटिका में उनसे मिलने आता था, तो वे उसकी तरफ न देखकर कुशा यानि घास के एक तिनके को उठाकर उसी की तरफ कर देती थी. जैसे ही रावण उस तिनके को छूता था तो उसे जोर का झटका लगता था. क्योंकि माता सीता की शक्तियों से वो कुशा भी एक आग के गोले में तब्दील हो जाती थी, जिसके कारण दुश्मन (रावण) उनके पास भटकने की ज़ुर्रत नहीं कर पाता था. ठीक वैसे ही स्वदेशी प्रोजेक्ट कुशा से दुश्मन के फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइल भारत की एयर-स्पेस में दाखिल होने से पहले हजार बार सोचेगी.

कुशा मिसाइल सिस्टम के बारे में क्या बोले रक्षा मंत्री?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार (23 जुलाई, 2026) को परीक्षण का वीडियो और तस्वीर जारी करते हुए अपने आधिकारिक X हैंडल से किए पोस्ट में पर लिखा, ‘DRDO ने ओडिशा के तट पर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लंबी दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल कुशा का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया.’

उन्होंने लिखा, ‘कुशा मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, UAV और बड़े दुश्मन विमानों सहित विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों को एक विस्तृत रेंज और ऊंचाई के दायरे में निष्क्रिय करने में सक्षम है. लंबी दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली विकसित करने की क्षमता दुनिया के सिर्फ कुछ ही देशों के पास है. इससे ऐसे सिस्टम के लिए आयात पर निर्भरता भी समाप्त होगी और यह देश की वायु रक्षा क्षमता में एक बड़ी छलांग का प्रतीक है.’ 

21,700 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुआ प्रोजेक्ट कुशा

जानकारी के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने साल 2023 में DRDO को 21,700 करोड़ के लागत वाले ‘प्रोजेक्ट कुशा’ के लिए अपनी मंजूरी (यानी आवश्यकता की मंजूरी जिसे AON कहा जाता है) दी थी. इस प्रोजेक्ट के तहत डीआरडीओ लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल यानी लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल की पांच स्क्वड्रन तैयार करेगा. DRDO ने साल 2028-29 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा है. उसी कड़ी में गुरुवार (23 जुलाई) का टेस्ट अहम माना जा रहा है. 

कुशा प्रोजेक्ट के तहत तीन तरह की मिसाइल विकसित करने का प्लान

DRDO ने इस प्रोजेक्ट के तहत तीन तरह की मिसाइल को विकसित करने का प्लान तैयार किया है. ये तीन मिसाइल 150 किलोमीटर, 250 किलोमीटर और 400 किलोमीटर की दूरी पर दुश्मन के हवाई हमले को विफल करने में सक्षम होंगी. ऐसे में दुश्मन के फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइल को उनकी स्पीड के अनुसार अलग-अलग दूरी पर मार गिराया जा सकता है. टोही विमान या फिर मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को ये मिसाइल सिस्टम 350 से 400 किलोमीटर की दूरी पर ही तबाह कर सकती है. लड़ाकू विमान को 250 किलोमीटर की दूरी पर नेस्तनाबूद कर देगी.

इसके अलावा, दुश्मन के स्टील्थ फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल और प्रेशेसियन म्युनिशन को भी मार गिरा सकने की ताकत भी इस कुशा मिसाइल में होगी. ये दुश्मन के टारगेट को ‘लो-रडार क्रॉस सेक्शन’ पर भी मार गिरा सकती है यानि जो एरियल टारगेट बेहद ही कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं. 

2018 में भारत ने रूस से खरीदी थी S-400 मिसाइल सिस्टम

लंबी दूरी पर दुश्मन के हवाई हमलों से निपटने के लिए भारत ने साल 2018 में रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम खरीदी थी. ये सिस्टम 380-400 किलोमीटर की दूरी पर दुश्मन के एरियल अटैक को मार गिराने का दम रखती है. 5.43 बिलियन डॉलर (करीब 39 हजार करोड़) में भारत ने रूस से ऐसी पांच स्क्वाड्रन खरीदी हैं. इनमें से तीन स्क्वाड्रन भारत को मिल चुकी हैं, जिन्हें चीन और पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर तैनात किया गया है.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारतीय वायुसेना ने एस-400 मिसाइल सिस्टम का पाकिस्तान के खिलाफ सटीक निशाना लगाते हुए लड़ाकू विमान और टोही विमान मार गिराए थे. एक टोही विमान को करीब 400 किलोमीटर की दूरी पर आसमान में मार गिराया था, जो सैन्य इतिहास का अब तक का सबसे लंबी दूरी पर एरियल हिट था.

स्वदेशी कुशा मिसाइल सिस्टम से आयात पर निर्भरता होगी कम

हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते दो स्क्वाड्रन की डिलीवरी में देरी चल रही है. ये देरी डॉलर में पेमेंट न होने के चलते हो रही है, लेकिन माना जा रहा है कि अगले एक साल में ये दोनों स्क्वाड्रन भी भारत पहुंच जाएंगी. ऐसे में कुशा प्रोजेक्ट से भारत को एस-400 जैसे उन्नत किस्म की एयर डिफेंस सिस्टम पर निर्भरता भी बेहद कम हो जाएगी. जैसा कुशा के परीक्षण पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है.

प्रोजेक्ट कुशा के तहत तैयार होने वाली मोबाइल एलआर-सैम प्रणाली को वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) से जोड़ा जाएगा, ताकि भारत की एयर-स्पेस को मजबूत सुरक्षा दी जा सके. रूस की एस-400 प्रणाली की तरह ही मोबाइल होने के चलते LR-SAM को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है.

इस वक्त भारत की एयरस्पेस सुरक्षा की जिम्मेदारी किस पर?

फिलहाल, भारत की एयर स्पेस की जिम्मेदारी फिलहाल लंबी दूरी की एस-400 सिस्टम के पास है, तो मध्यम दूरी के लिए डीआरडीओ की तरफ से विकसित ‘बराक’ MR-SAM के हवाले है. ये मीडियम रेंज-सर्फेस टू एयर मिसाइल DRDO ने इजरायल की मदद से तैयार की है.

MR-SAM की रेंज करीब 70 किलोमीटर है. वहीं, कम दूरी के लिए भारत के पास ‘आकाश’ मिसाइल है, जिसकी रेंज 24 किलोमीटर है. इसके अलावा, भारत के पास इजरायल की कम दूरी की ‘स्पाइडर’ मिसाइल है, तो कंधे से मार करने वाली पुरानी ‘इग्ला’, ‘ओसा’ और ‘पिचोरा’ मिसाइल भी हैं. 

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