दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय कोस्ट गार्ड के अधिकारियों के लिए एक अहम फैसला सुनाया है. दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सी. हरिशंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने कहा कि अब कोस्ट गार्ड के सभी रैंकों के अधिकारियों की रिटायर होने की उम्र 60 साल होगी. इसके साथ ही कोर्ट ने उन पुराने नियमों को रद्द कर दिया, जिनमें अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग रिटायरमेंट उम्र तय की गई थी.

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अब तक के नियमों में कमांडेंट और उससे नीचे रैंक के अधिकारियों को 57 साल की उम्र में रिटायर होना पड़ता था, जबकि कमांडेंट और उससे ऊपर के अधिकारी 60 साल तक सेवा दे सकते थे. कोर्ट ने इस अंतर को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि इसके पीछे कोई तार्किक आधार नहीं है. यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है, जो सभी को समान अवसर और बराबरी का अधिकार देते हैं.

कोस्ट गार्ड के अधिकारियों ने दाखिल की थी याचिका

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दिल्ली हाई कोर्ट में यह मामला उन अधिकारियों की याचिकाओं से जुड़ा था, जो याचिका दायर करते समय नौकरी में थे, लेकिन नियम के मुताबिक 57 साल की उम्र पूरी होते ही रिटायर कर दिए गए थे. कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि BSF, CRPF, ITBP और SSB में भी पहले इसी तरह का मुद्दा उठा था. वहां भी रैंक के आधार पर अलग-अलग रिटायरमेंट उम्र को खत्म कर एक समान उम्र सीमा लागू की गई थी. केंद्र सरकार ने दलील दी थी कि तटरक्षक बल समुद्री सेवा है. इसमें जवानों का युवा और फिट होना जरूरी है, लेकिन हाई कोर्ट ने कहा कि इस आधार पर दो वर्ग बनाकर अलग नियम लागू नहीं किए जा सकते. दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा कि चाहे तटरक्षक बल सीएपीएफ का हिस्सा हो या नहीं, लेकिन समानता का सिद्धांत हर सेवा पर लागू होता है.

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