Raju Bista To Meet Amit Shah: पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग सीट से बीजेपी सांसद राजू बिष्ट 15 दिन के भीतर तीसरी बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलेंगे. इस बात की जानकारी खुद राजू बिष्ट ने दी. इन मुलाकातों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए इस सीट पर मुश्किल स्थिति है. साथ ही ऐसी भी अटकलें हैं कि बीजेपी अगले लोकसभा चुनाव में इस सीट से एक वरिष्ठ नौकरशाह को मैदान में उतार सकती है.


इस बीच कुर्सियांग से बीजेपी के विधायक बिष्णु पद शर्मा ने बुधवार (10 जनवरी) को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से दार्जिलिंग लोकसभा सीट से एक स्थानीय उम्मीदवार को मैदान में उतारने का आग्रह किया.


उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर पार्टी किसी बाहरी व्यक्ति को यहां उम्मीदवार बनाती है तो वह निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि बाहरी लोग दार्जिलिंग के लोगों के मुद्दों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं.  शर्मा ने कहा कि दार्जिलिंग के मौजूदा सांसद राजू बिस्ट गोरखा समुदाय से हैं, लेकिन वह मणिपुर के रहने वाले हैं.


इससे पहले राजू बिष्ट ने द टेलीग्राफ से बात करते हुए कहा, "मैं इस हफ्ते फिर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलूंगा. मुझे विश्वास है कि हमारे लोगों और क्षेत्र को न्याय जरूर मिलेगा.'' एक पखवाड़े में बिष्ट की शाह से यह तीसरी मुलाकात होगी.


2009 से बीजेपी के पास है दार्जिलिंग सीट
बीजेपी ने 2009, 2014 और 2019 में दार्जिलिंग लोकसभा सीट से जीत हासिल की थी. सबसे पहले जसवंत सिंह 2009 में दार्जिलिंग से बीजेपी के सांसद बने थे, उसके बाद 2014 में एस एस अहलूवालिया और 2019 में राजू बिष्ट सांसद बने.


गोरखा समुदायों को आदिवासी दर्जा देने का वादा
2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान बीजेपी ने पहाड़ी इलाके के लिए एक स्थायी राजनीतिक समाधान खोजने और 11 गोरखा समुदायों को आदिवासी दर्जा देने का वादा किया था. भले ही बीजेपी ने परमानेंट सोल्यूशन को परिभाषित नहीं किया है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में ज्यादातर लोगों ने इसकी व्याख्या गोरखालैंड राज्य के रूप में की है.


'मैं चैन से नहीं बैठूंगा'
बिष्ट ने कहा, "मैं लोगों को आश्वस्त करता हूं कि मैं यह सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास कर रहा हूं कि हमारे क्षेत्र के लोगों को भी सम्मान और प्रतिष्ठा का जीवन मिल सके. जब तक हमारी सामूहिक आकांक्षाएं पूरी नहीं हो जातीं, मैं चैन से नहीं बैठूंगा."


बता दें कि सिक्किम के मुख्यमंत्री पी एस तमांग भी गोरखा समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने के लिए केंद्र से भी पैरवी कर रहे हैं. दिवासी दर्जे की मांग करने वाले 11 समुदायों में भुजेल, गुरुंग, मंगर, नेवार, जोगी, खास, राय, सुनुवर, थामी, यक्का (दीवान) और धिमल शामिल हैं.


पीएम मोदी को लिखा था पत्र
पिछले हफ्ते दार्जिलिंग से सभी 11 समुदायों के प्रतिनिधियों की एक टीम इस मांग को लेकर दिल्ली भी गई थी. इसके अलावा दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के बीजेपी के मंडल प्रमुखों ने भी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखा था. इसमें साढ़े उन्होंने चार साल बाद भी अपने चुनावी वादों को पूरा करने में केंद्र की विफलता के कारण आम लोगों का सामना करने में हो रही अपनी असुविधा के बारे में बताया था.


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