मुंबई: बांबे हाई कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मानसून में हर साल रेल की पटरियां डूब जाती हैं लेकिन रेलवे ने इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है. मूसलाधार बारिश से उपनगरीय रेल सेवाओं के ठप पड़ने के बाद अदालत ने यह टिप्पणी की. जस्टिस एन एच पाटिल और जस्टिस जी एस कुलकर्णी की पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही. याचिका में रेलवे के स्टेशनों और प्लेटफॉर्मों को दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी.
अदालत ने पाया कि इस संबंध में अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है और उसने पटरियों पर पानी भरने का मामला भी उठाया. जस्टिस कुलकर्णी ने पूछा, ‘‘हर साल मानसून में निचले इलाकों में पटरियां पानी में डूब जाती हैं. रेलवे इन स्थानों को चिन्हित कर पटरियों को ऊपर क्यों नहीं उठा सकता?’’
अदालत ने कहा कि अगर रेलवे इससे निपट नहीं सकता तो इसके निजीकरण पर विचार किया जाना चाहिए. पीठ ने दो सप्ताह के लिए सुनवाई स्थगित करते हुए रेलवे के वकील से कहा कि अगली सुनवाई में अदालत को पटरियों पर पानी भरने से रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताए.