बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ से केंद्र और चुनाव आयोग को जारी नोटिस के फैसले पर कहा है कि यह फैसला दिखाता है कि देश की सभी संस्थाएं आजादी से काम कर रही हैं. देश में डर-तानाशाही का कोई माहौल नहीं है.
बीजेपी सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने दिल्ली में पार्टी हेडक्वार्टर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने कहा, 'देश बहुत लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ रहा है. हर कोई खुलकर अपनी बात कह रहा है. सभी प्रोसेस और सिस्टम का पालन किया जा रहा है. लोकतंत्र का इससेबेहतर मॉडल और कहां हो सकता है? मुझे लगता है कि भारत लोकतंत्र का जश्न मना रहा है.'
सुप्रीम कोर्ट में हुई याचिका पर सुनवाई
पात्रा की टिप्पणी ऐसे वक्त आई है, जब सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार की अगुवाई वाली पैनल के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए ईसी और केंद्र से एक हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है. याचिका में ज्ञानेश कुमार पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों को नजरंदाज कर अकेले फैसले लेने का आरोप लगाया गया है.
इसमें इंडिया एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला दिया है. हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच ने इस मामले में कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है.
बेंच का कहना है कि वह सिर्फ मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आदेश पारित नहीं कर सkती. यह सही हो भी सकती है और नहीं भी. बेंच ने कहा है कि अगर ईसी के कोई फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ने एकतरफा तौर पर लिए पाए जाते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट इस पर पुनर्विचार कर सकता है. उन्हें वापस ले सकता है.
सीजेआई ने सुनवाई के दौरान क्या कहा है? मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि ईसी से उम्मीद की जाती है कि फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं. अगर सर्वसम्मति नहीं तो फैसला बहुमत से होना चाहिए. अगर रिकॉर्ड से पता चलता है कि कोई फैसला सर्वसम्मति से नहीं लिया गया था तो हम उन फैसलों पर रोक लगा देंगे. कहेंगे कि वे अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं. क्या हम एकतरफा तौर पर यह फैसला ले सकते हैं, सभी फैसले एकतरफा थे? हम उम्मीद करते हैं कि वे इसका सही तरीके से जवाब देंगे.
ईसी और सीईसी पर क्यों लग रहे हैं आरोप? हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में वोटर लिस्ट की एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार ऑफिशियल आपत्ति जताई थी. इसमें कुछ फैसले बिना जानकारी के लिए गए थे. इसके अलावा रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर ने इलेक्शन रूल के तहत जरूरी कानूनी बदलाव किए बिना ही वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म में पूर्वजों की जानकारी और पिछले एसआईआर का लिंक जोड़ने की जरूरी शर्तें जोड़ दी थी.
