बीजेपी शासित बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात में हाल ही में हुए उपचुनावों के लिए वोटों की गिनती हो रही है. बिहार की बांकीपुर विधानसभा, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मंजलपुर सीट के लिए गुरुवार को चुनाव हुए थे. पेपर लीक को लेकर देश भर में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद यह पहला चुनाव है. इन नतीजों से देश और खासकर युवा वोटरों का मूड पता चल सकेगा.

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बिहार का बांकीपुर बीजेपी का गढ़ है, जहां से बीजेपी का कोई भी उम्मीदवार कभी नहीं हारा है. राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद बीजेपी नेता नितिन नवीन ने ये सीट छोड़ दी थी. पिछले महीने नॉमिनेशन पेपर भरने के एक दिन बाद BJP उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए अपना नाम वापस ले लिया. इसके बाद बीजेपी ने युवा विंग के नेता नीरज कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया. विपक्षी नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि पार्टी प्रमुख द्वारा खाली की गई सीट पर हार की आशंका से पार्टी घबराई हुई है.

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मध्य प्रदेश में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के प्रावधानों के तहत 2 अप्रैल को कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के अयोग्य घोषित होने के बाद दतिया विधानसभा सीट खाली हो गई थी. बीजेपी के आशुतोष तिवारी, जो अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह से है.

नरोत्तम मिश्रा का गढ़ रही है दतियादतिया विधानसभा पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का गढ़ मानी जाती है, जिन्होंने 2008 से 2018 तक लगातार तीन बार इसका प्रतिनिधित्व किया. मिश्रा 2023 के विधानसभा चुनाव में यह सीट हार गए थे. इस बार, उम्मीदवार बदलने से मिश्रा के समर्थक नाराज हैं और उन्होंने राज्य में कई विरोध प्रदर्शन किए हैं.

2 बार के पूर्व विधायक और शाही परिवार से आने वाले कुंवर घनश्याम सिंह ने 1993 और 2003 में ये सीट जीती थी. वे पुराने समर्थन, व्यक्तिगत साख और बीजेपी कार्यकर्ताओं के कुछ वर्गों में मौजूद असंतोष के भरोसे चुनाव लड़ रहे हैं.

गुजरात की मंजलपुर सीटमंजलपुर सीट बीजेपी के मौजूदा विधायक योगेशभाई नरनदास पटेल के निधन के बाद खाली हो गई थी. वे लगातार 3 बार इस सीट से विधायक रहे. यहां मुख्य मुकाबला बीजेपी के पूर्व वडोदरा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन पार्षद सतीश गोविंदभाई पटेल और पूर्व मंत्री व गुजरात कांग्रेस के उपाध्यक्ष भीखाभाई रबारी के बीच है.

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