बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और अब राज्यसभा सांसद बने नीतीश कुमार को पद छोड़ने के बाद भी Z+ श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी. इस संबंध में गृह विभाग की विशेष शाखा ने आधिकारिक आदेश जारी किया है. आदेश में साफ कहा गया है कि उन्हें बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट 2000 के तहत यह सुरक्षा दी जा रही है. यह फैसला उनकी सुरक्षा की समीक्षा के बाद लिया गया है.
नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए हैं और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं. नई जिम्मेदारी को देखते हुए उनकी सुरक्षा को बनाए रखने और मजबूत करने का फैसला लिया गया है, ताकि देशभर में उनके लिए सुरक्षा का पूरा इंतजाम रहे.
क्या है Z+ सुरक्षा?
Z+ सुरक्षा भारत में सबसे ऊंचे स्तर की सुरक्षा मानी जाती है, जो खास लोगों को दी जाती है. इसमें कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था होती है. सबसे अंदर एनएसजी कमांडो तैनात रहते हैं, जो आधुनिक हथियारों से लैस होते हैं. इसके बाहर विशेष शाखा के अधिकारी और फिर स्थानीय पुलिस या अर्धसैनिक बल का घेरा होता है. इस सुरक्षा में बुलेटप्रूफ गाड़ियां, एस्कॉर्ट वाहन और जैमर जैसी आधुनिक सुविधाएं भी शामिल होती हैं. हर समय निगरानी रखी जाती है, ताकि किसी भी तरह के खतरे को तुरंत रोका जा सके. नीतीश कुमार करीब दो दशक तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं. उनके इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली है.
किसे मिलता है Z+ सुरक्षा?
भारत में Z+ यानी जेड प्लस सुरक्षा सबसे ऊंचे स्तर की सुरक्षा में गिनी जाती है. यह सुरक्षा खास और महत्वपूर्ण लोगों को दी जाती है, जैसे प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, बड़े अधिकारी और सुप्रीम कोर्ट के जज. इसके अलावा जिन लोगों को खुफिया एजेंसियों जैसे आईबी या रॉ से जान का खतरा बताया जाता है, उन्हें भी यह सुरक्षा दी जाती है. इस तरह की सुरक्षा का मकसद होता है कि व्यक्ति हर समय सुरक्षित रहे और किसी भी खतरे से तुरंत बचाव किया जा सके.
