Ambedkar Jayanti 2020: जानें डॉ बी आर अंबेडकर के जीवन से जुड़ी बातें, जानें मुंबई से कोलंबिया विश्वविद्यालय तक सफर
Ambedkar Jayanti 2020: संविधान निर्माता डॉ भीम राव अंबेडकर को जीवन में बहुत कठिनाइयों को का सामना करना पड़ा. बचपन से ही उनके साथ भेदभाव शुरू हो गया था. लेकिन इन सबके बाद भी डॉक्टर अंबेडकर रूके नहीं. निरंतर गरीब, दलित और शोषितों की मुखर आवाज बन कर उभरे. आज इनका जन्मदिन है. डॉ अंबेडकर से जुड़े 5 स्थानों को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. वे पहले दलित थे जो मुंबई के एल्फिंस्टन हाई स्कूल में पढ़ने गए. आइए जानते हैं इनके बारें में.
एबीपी न्यूज़ Last Updated: 13 Apr 2020 10:11 PM
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Ambedkar Jayanti 2020: भारत रत्न डॉक्टर भीम राव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 में हुआ था. उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था....More
Ambedkar Jayanti 2020: भारत रत्न डॉक्टर भीम राव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 में हुआ था. उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था. डॉक्टर अंबेडकर बचपन से ही मेधावी थे. डॉक्टर भीम राव अंबेडकर की जाति महार होने के कारण उन्हें भेदभाव को शिकार होना पड़ा. स्कूल में उन्हें कक्षा के बाहर खड़े होकर पढ़ाई करनी पड़ती थी, उच्च जाति के छात्र उनके पास आने को भी बुरा मानते थे. स्कूल में उन्हें पानी पीने का भी अधिकार नहीं था. उन्हें प्यास लगने पर दूर से ही पानी पीने दिया जाता था. इस तरह के अनुभवों ने डॉक्टर अंबेडकर के बाल मन पर गहरा प्रभाव छोड़ा. निम्न जाति और गरीब होने के कारण डॉक्टर अंबेडकर ने बहुत पीड़ा सही. लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी. वे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहे. डॉक्टर अंबेडकर का बाल विवाह हुआ था. अप्रैल 1906 में डाक्टर भीम राव अंबेडकर की उम्र जब 15 वर्ष की थी, तो उनका विवाह रमाबाई से करा दिया गया. तब रमाबाई महज 9 बर्ष की थीं. उस समय डॉक्टर अंबेडकर पांचवी कक्षा में थे. संघर्षों से भरा रहा जीवनडॉक्टर अंबेडकर के पिता एक सैनिक थे. 1894 में वे सेवानिवृत्त हो गए और इसके दो साल बाद ही डॉक्टर अंबेडकर की मां की भी मृत्यु हो गई. ऐसे में बच्चों की देखभाल की समस्या खड़ी हो गई. तब उनकी चाची ने सभी बच्चों की देखभाल की. लेकिन इस दौरान विषम परिस्थितियों में रामजी सकपाल के केवल तीन बेटे, बलराम, आनंदराव और भीमराव और दो बेटियाँ मंजुला और तुलासा ही इन कठिन हालातों मे जीवित बच पाए. अपने भाइयों और बहनों मे डॉक्टर अंबेडकर ही स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर सके. बौद्ध धर्म ग्रहण कियाडॉक्टर अंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में अपने हजारों समर्थकों के साथ एक औपचारिक सार्वजनिक समारोह का आयोजन किया. डॉक्टर अंबेडकर ने एक बौद्ध भिक्षु से पारंपरिक तरीके से तीन रत्न ग्रहण और पंचशील सिद्धांत को अपनाते हुए बौद्ध धर्म ग्रहण किया. परिनिर्माणडॉक्टरअंबेडकर की तबीयत 1954 में बिगड़ने लगी. उन्हें डायबिटीज थी. जिस कारण उन्हें परेशानियां होने लगीं थीं. 6 दिसंबर 1956 को डॉक्टर भीम राव अंबेडकर की मृत्यु हो गई. इस दिन को परिनिर्माण दिवस के रूप में मनाया जाता है. Ambedkar Jayanti 2020: भारत रत्न डॉ अंबेडकर ने कैसे लड़ी भेदभाव के खिलाफ लड़ाई और क्या थे उनके विचार, जानें
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अंबेडकर ने मुंबई विश्वविद्यालय, कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स भी शिक्षा ग्रहण की. इसके बाद वे पूरी तरह से लोगों को जागरुक करने में जुट गए. भारत लौटकर वे दलित बौद्ध आंदोलन से जुड़ गए और 14 अक्टूबर 1956 को उन्होंने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया. डॉक्टर अंबेडकर को 1990 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया.