Mohammad Yunus on relations with India: बांग्लादेश में राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ रही है. पिछले साल शेख हसीना सरकार के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ा. इसके बाद 84 साल के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार का नेतृत्व करना शुरू किया. यूनुस ने शेख हसीना के विपरीत भारत से दूरी बनाई और चीन-पाकिस्तान के साथ नजदीकी बढ़ाने की नीति अपनाई है. पूर्वोत्तर सुरक्षा के मुद्दे और उनके कई बयानों पर भारत में नाराजगी देखी गई है.

मोहम्मद यूनुस ने "द वीक" को दिए एक इंटरव्यू में बांग्लादेश की घरेलू चुनौतियों और पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों पर अपनी राय दी. भारत को उन्होंने बांग्लादेश का सबसे खास पड़ोसी बताया.

'बांग्लादेश के बिना नहीं बना सकते भारत का नक्शा'

भारत से रिश्तों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाल की मुलाकात पर मोहम्मद यूनुस ने कहा कि बांग्लादेश और भारत के बीच संबंध दुनिया में सबसे बेहतरीन होने चाहिए, क्योंकि हम बहुत करीबी पड़ोसी हैं. उन्होंने कहा कि हम बांग्लादेश का नक्शा बनाए बिना भारत का नक्शा नहीं बना सकते, जो हमारी नजदीकी को दिखाता है. यूनुस ने कहा कि हमारे बीच मिलकर रहने से कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए.

यूनुस ने आगे कहा, "बहुत से ऐसे घर हैं, जिनका एक हिस्सा भारत में है और दूसरा हिस्सा बांग्लादेश में. हम स्वभाव से एक जैसे हैं, एक जैसी भाषा बोलते हैं और हमारा इतिहास भी एक है. जब हम इतने करीबी हैं तो अगर हमारे रिश्तों में कोई दिक्कत है तो हमें यह समझने की जरूरत है कि समस्या कहां है. मैंने इस बात को उठाया है क्योंकि हमारा भविष्य आपस में जुड़ा हुआ है."

'मैं सबको जोड़ने की बात कर रहा हूं'

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर अपनी हालिया टिप्पणी पर सफाई देते हुए बांग्लादेश के अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस ने कहा कि उनके बयान को गलत समझा गया. यूनुस ने कहा, "मैं सभी को एकजुट करने की बात कर रहा हूं, लेकिन कुछ लोगों ने इसे कब्जे की कोशिश बताई. मैं कोई जनरल नहीं हूं जो किसी पर कब्जा करेगा. मैं वह इंसान हूं जो सभी को साथ लाने की कोशिश कर रहा है."

उन्होंने आगे कहा कि वह हमेशा दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) को मजबूत करने की बात करते हैं. SAARC आपस में लड़ने के लिए नहीं, बल्कि समस्याओं के समाधान के लिए है." 

चीन और पाकिस्तान के साथ बांग्लादेश के रिश्तों पर यूनुस ने कहा कि यह संबंध मुख्य रूप से आर्थिक जरूरतों के चलते हैं. उन्होंने बताया, "चीन के साथ हमारा काफी व्यापार होता है. हम वहां से बहुत सारी चीजें खरीदते हैं. हमारा मकसद इन रिश्तों को आर्थिक रूप से अपने देश के लिए फायदेमंद बनाना है." यूनुस ने यह भी साफ किया कि बांग्लादेश न सिर्फ चीन और पाकिस्तान के साथ, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया और आसियान (ASEAN) देशों के साथ भी मजबूत रिश्ते बनाना चाहता है.