भारत के नक्शे पर चार राज्यों उत्तराखंड, गुजरात, गोवा और असम के बीच एक रेखा खिंच गई है, जिसके पार सब कुछ बदल जाता है. शादी का तरीका, बच्चों का हक और परिवार में हैसियत इस बात पर तय होता है कि आप किस तरफ खड़े हैं. दरअसल, समान नागरिक संहिता (UCC) ने चार राज्यों में अपनी जड़ें जमा ली हैं, लेकिन हर राज्य की मिट्टी में इसका रंग थोड़ा अलग है. चारों राज्यों के UCC की मुकम्मल तस्वीर सामने रखते हैं, ताकि आपको साफ दिखे कि आपके राज्य में क्या बदलेगा और क्या नहीं...
सबसे पहले 4 राज्यों में UCC को ग्राफिक्स से समझते हैं:
चारों राज्यों में क्या कॉमन है?
- बहुविवाह पर रोक: चारों राज्यों में एक से ज्यादा शादी करना गैरकानूनी है (हालांकि गोवा में हिंदू पुरुषों के लिए सीमित अपवाद है).
- शादी की न्यूनतम उम्र: सभी जगह लड़कों के लिए 21 और लड़कियों के लिए 18 साल.
- विवाह का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: हर शादी का सरकारी रिकॉर्ड जरूरी.
- बेटियों को संपत्ति में बराबरी: सभी राज्यों में बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार.
- सभी धर्मों के लिए एक कानून: विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में धार्मिक भेदभाव खत्म.
और क्या है अलग?
- गोवा का UCC सबसे पुराना है (1867 से) लेकिन सबसे ज्यादा अपवादों और खामियों से भरा हुआ है.
- उत्तराखंड, गुजरात और असम तीनों आधुनिक राज्यों ने लगभग एक जैसा UCC बनाया है जो गोवा से काफी आगे है.
- लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर गोवा चुप है, जबकि बाकी तीनों राज्यों ने इसे अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के दायरे में ला दिया है.
- उत्तराखंड और गुजरात में सिर्फ ST को छूट है, जबकि असम ने पहाड़ी और मैदानी दोनों आदिवासी समुदायों को पूरी तरह बाहर रखा है.
- असम ने साफ शब्दों में धार्मिक प्रथाओं को UCC से बाहर रखने का वादा किया है, जो दूसरे राज्यों में इतनी स्पष्टता से नहीं कहा गया है.
UCC की यह लहर अभी थमी नहीं है. मध्य प्रदेश पहले ही मसौदा तैयार करने के लिए उच्च स्तरीय समिति बना चुका है. राजस्थान, हरियाणा और छत्तीसगढ़ जैसे बीजेपी शासित राज्यों में भी UCC लाने की तैयारी चल रही है. पश्चिम बंगाल में तो अमित शाह ने सरकार बनने पर छह महीने के भीतर UCC लागू करने का वादा तक कर दिया है.
