ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार (24 जुलाई, 2026) को दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET यूजी परीक्षा 2026 के पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है. उन्होंने इसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के विरोध को दबाने के लिए बार-बार दोहराया जाने वाला तरीका बताया, बजाय इसके कि सरकार बातचीत करे.
प्रदर्शनकारी हफ्तों से वहां थे, सरकार उनसे बात करे- ओवैसी
संसद के मॉनसून सत्र के दौरान संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘कल गुरुवार (23 जुलाई, 2026) जो हुआ, वो इस सरकार के लगातार दिख रहे व्यवहार को दर्शाता है. प्रदर्शनकारी हफ्तों से वहां थे और सरकार को उनसे ठीक से बातचीत करनी चाहिए थी. यह पूरी तरह से कुप्रबंधन है.’
उन्होंने कहा, ‘प्रदर्शन के वीडियो देखने के बाद जिस तरह से छात्रों को पीटा और परेशान किया गया, उसे कोई भी संवेदनशील व्यक्ति समझ सकता है.’
असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर लगाए आरोप
हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने वकीलों के विरोध, किसानों के आंदोलन और CAA-विरोधी प्रदर्शनों से निपटने के सरकार के तरीकों की तुलना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार चिंताओं को दूर करने के बजाय प्रदर्शनों को दबाने का तरीका अपनाती है. उन्होंने आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद से भी मुलाकात की, जो प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई के विरोध में संसद परिसर में भूख हड़ताल पर बैठे हैं.
इससे पहले, साल 2024 में ओवैसी ने NEET के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में दोबारा परीक्षा कराने की मांग की थी. उन्होंने परीक्षा को मजाक बताया था और आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों का भविष्य बर्बाद कर दिया है. पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का लगातार समर्थन भी किया है.
यह भी पढ़ेंः सरकार 2 मांगों पर तैयार, प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी सीजेपी, जानें दूसरे राउंड की बैठक में क्या हुआ
