इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) से बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को बाहर किए जाने के फैसले पर सियासत तेज हो गई है. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधा है. ओवैसी ने सवाल उठाया कि अगर बांग्लादेश में हिंसा की घटनाओं पर सरकार आक्रोश जताती है, तो देश के भीतर होने वाली घटनाओं पर वही संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखाई जाती.
मुस्तफिजुर को KKR से हटाने का फैसलाकोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) ने शनिवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के निर्देश पर बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को आगामी आईपीएल सत्र से पहले अपनी टीम से रिलीज कर दिया. यह फैसला भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते द्विपक्षीय तनाव के मद्देनजर लिया गया है.
नीलामी में 9.20 करोड़ में खरीदे गए थे मुस्तफिजुरपिछले महीने हुई खिलाड़ियों की नीलामी में केकेआर ने मुस्तफिजुर रहमान को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था. उनका बेस प्राइस 2 करोड़ रुपये था. चेन्नई सुपर किंग्स और दिल्ली कैपिटल्स के साथ कड़ी बोली के बाद केकेआर ने इस 30 वर्षीय बाएं हाथ के तेज गेंदबाज को अपनी टीम में शामिल किया था.
ओवैसी का पीएम मोदी पर सीधा सवालमुस्तफिजुर को टीम से बाहर किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'हम सुन रहे हैं कि एक बांग्लादेशी खिलाड़ी को क्रिकेट टीम से हटा दिया गया. साथ ही बार-बार कहा जा रहा है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं. मैं कहीं भी अत्याचार का समर्थन नहीं करता. लेकिन मैं प्रधानमंत्री मोदी से यह पूछना चाहता हूं कि जब बांग्लादेश में मॉब लिंचिंग होती है तो आपको गुस्सा आता है, फिर महाराष्ट्र के जलगांव में जब एक बच्चे की हत्या होती है, तब वही गुस्सा क्यों नहीं दिखता?'
बांग्लादेश में हिंसा के बाद बढ़ा दबावहाल के दिनों में बांग्लादेश में एक हिंदू व्यक्ति की हत्या और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भारत ने चिंता जताई थी. इसी पृष्ठभूमि में बांग्लादेशी खिलाड़ी की आईपीएल में भागीदारी को लेकर बीसीसीआई पर दबाव बढ़ता गया, जिसके बाद यह फैसला लिया गया.
शाहरुख खान को भी झेलनी पड़ी आलोचनारहमान को टीम में बनाए रखने को लेकर केकेआर के सह-मालिक और बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को भी सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा था. कुछ वर्गों ने इस फैसले को राजनीतिक और कूटनीतिक हालात से जोड़ते हुए सवाल उठाए थे.