अहमदाबाद विमान हादसे को 12 जून को एक साल पूरा हो रहा है. नियमों के मुताबिक यही फाइनल रिपोर्ट की डेडलाइन भी थी लेकिन अब साफ हो गया है कि रिपोर्ट तय समय पर नहीं आएगी और पहली बार इसकी असली वजह भी सामने आ गई है. सूत्रों के मुताबिक विमान के इंजन अमेरिका में जांच के लिए भेजे गए हैं और वह जांच अभी पूरी नहीं हुई है.

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रिपोर्ट किस वजह से अटकी है ? 

सूत्रों के मुताबिक विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो यानी AAIB को इंजन बनाने वाली कंपनी जीई एयरोस्पेस की एनालिसिस रिपोर्ट का इंतजार है. हादसे का शिकार हुए बोइंग 787 के दोनों इंजन जांच के लिए अमेरिका के ओहायो में जीई एयरोस्पेस की फैसिलिटी भेजे गए हैं. अधिकारियों के मुताबिक इंजन जले हुए और क्षतिग्रस्त थे लेकिन काफी हद तक सही हालत में थे. जब तक यह जांच पूरी नहीं होती फाइनल रिपोर्ट जारी नहीं हो सकती.

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एक अधिकारी के मुताबिक इंजनों को आगे की जांच के लिए भेजा गया है और इसमें वक्त लग सकता है क्योंकि इनकी बेहद बारीक और विशेष जांच जरूरी है. एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि फाइनल रिपोर्ट का ज्यादातर काम पूरा हो चुका है बस इंजन जांच के नतीजों का इंतजार है. जीई एयरोस्पेस की तरफ से अभी यह संकेत भी नहीं मिला है कि उसकी एनालिसिस कब तक पूरी होगी. इसलिए फिलहाल यह बताना मुश्किल है कि रिपोर्ट कब जारी होगी.

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अब कल बरसी पर क्या आ सकता है ? 

फाइनल रिपोर्ट की जगह AAIB अब हादसे की पहली बरसी पर एक अंतरिम बयान जारी करेगा. यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत उसकी बाध्यता है. मई में भी सामने आया था कि यह अंतरिम रिपोर्ट शुरुआती रिपोर्ट से ज्यादा डिटेल्ड होगी और इसमें हादसे की संभावित मुख्य वजहों की पड़ताल होगी.

फाइनल रिपोर्ट कब तक आ सकती है

अभी तक मिल रही जानकारी के मुताबिक AAIB डेडलाइन तक अपनी पूरी जांच इसलिए पूरी नहीं कर पाएगा क्योंकि अमेरिका में इंजनों की अहम तकनीकी जांच अभी जारी है. इसकी जगह AAIB इसी हफ्ते एक स्टेटस रिपोर्ट जारी करेगा जिसमें देरी की वजहें और जांच की प्रगति बताई जाएगी. फाइनल रिपोर्ट अब अगले करीब तीन महीनों में आने की उम्मीद है.

नियम क्या कहते हैं

अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन यानी ICAO के एनेक्स 13 के तहत हादसे के एक साल के भीतर फाइनल जांच रिपोर्ट जारी करनी होती है. अगर ऐसा मुमकिन न हो तो जांच एजेंसी को हर साल जांच की प्रगति पर स्टेटस अपडेट जारी करना जरूरी है.

 ब्रिटेन के AAIB के प्रिंसिपल इंस्पेक्टर ने पीड़ित परिवारों को लिखे पत्र में भी यही बात कही थी -  उन्होंने भारत के AAIB से रिपोर्ट के प्रकाशन की समयसीमा मांगी थी लेकिन कोई तारीख नहीं मिली. हादसे में 52 ब्रिटिश नागरिकों की मौत की वजह से ब्रिटेन भी इस जांच में शामिल है.

एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं

एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन आंकड़ों के मुताबिक 2018 से 2023 के बीच हुए हादसों में से सिर्फ 57 फीसदी की फाइनल जांच रिपोर्ट ही सार्वजनिक हो पाई हैं. उनके मुताबिक यह कमी इंडस्ट्री की बड़े हादसों से सबक लेने की क्षमता को सीमित करती है. कंपोनेंट की डिफेक्ट जांच बेहद तकनीकी काम है. इसके लिए खास टेस्ट बेंच और इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए और फाइनल रिपोर्ट का पूरा होना काफी हद तक उपकरण बनाने वाली कंपनी पर निर्भर करता है. इस मामले में वह कंपनी जीई एयरोस्पेस है.

कंपनियों का क्या रुख है

जीई एयरोस्पेस ने काफी जगह ग्लोबल मीडिया को एनेक्स 13 के नियमों का हवाला देकर टिप्पणी से इनकार कर दिया और सवालों के लिए AAIB और अमेरिकी जांच एजेंसी NTSB की ओर भेज दिया. 

बोइंग सूत्रों ने भी कहा कि जांच भारत का AAIB कर रहा है इसलिए जानकारी देने का अधिकार उसी का है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि इंजन कब भेजे गए और जीई एयरोस्पेस से जवाब कब तक आने की उम्मीद है.

एक साल बाद भी सबसे बड़ा सवाल बाकी

12 जून 2025 को एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 अहमदाबाद से लंदन गैटविक जाते वक्त टेकऑफ के 32 सेकंड बाद क्रैश हो गई थी. विमान मेडिकल कॉलेज की इमारत से टकराकर आग के गोले में बदल गया. हादसे में 260 लोगों की जान गई जिनमें विमान में सवार 242 में से 241 लोग शामिल थे. यह करीब तीन दशकों में भारत का सबसे बड़ा विमान हादसा है. 

एक साल बाद भी जांचकर्ता यही पता लगाने में जुटे हैं कि विमान आखिर गिरा क्यों. इस सवाल का जवाब अब फाइनल रिपोर्ट से ही मिलेगा जिसका इंतजार और लंबा हो गया है.

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