ममता बनर्जी के काफिले पर हुए कथित हमले को लेकर सियासत गरमा गई है. टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने इस घटना के लिए शुभेंदु सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. अभिषेक ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले पर हुआ अटैक 'राज्य प्रायोजित हमला था.' उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर इस घटना को समर्थन देने और शुभेंदु अधिकारी पर इस हमले को अंजाम देने का आरोप लगाया.

Continues below advertisement

अभिषेक बनर्जी ने कहा, 'ममता बनर्जी सिर्फ टीएमसी की अध्यक्ष ही नहीं हैं,वह पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं और अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई अन्य विभागों का कार्यभार संभाल चुकी हैं. उन्होंने आगे कहा, 'हमलावरों को कई मौकों पर भाजपा नेताओं के साथ देखा गया है. वे विपक्ष को अस्तित्व में नहीं रहने देना चाहते, वे विपक्षी नेताओं को मारना चाहते हैं.' बनर्जी ने आगे कहा, 'प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस घटना के पीछे पूरा समर्थन प्राप्त था, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तो बस इसे अंजाम दिया.'

घटना के पीछे बीजेपी कार्यकर्ताओं का हाथ - सौगत रॉय

Continues below advertisement

उधर, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने भी ममता बनर्जी के काफिले पर हुए कथित हमले की निंदा की. उन्होंने घटना के पीछे बीजेपी कार्यकर्ताओं का हाथ होने का आरोप लगाया. रॉय ने कहा, 'इसकी निंदा करने के लिए मेरे पास शब्द कम पड़ रहे हैं. तृणमूल का एक कार्यकर्ता पुलिस हिरासत में शहीद हो गया. वह अपने घर जा रहा था, इस पर कोई जन आक्रोश नहीं हुआ. यह भाजपा के 'गुंडों' का प्रकोप है. हम इसका कड़ा विरोध और निंदा करते हैं.'

अमित शाह के कार्यक्रम में कलेक्टर ने लगाई दौड़, जानें IAS का दिल्ली कनेक्शन

क्या है पूरा मामला?

उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना राजनीतिक हिंसा को दर्शाती है और सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाती है. उन्होंने कथित हमले के लिए जवाबदेही की मांग की और विपक्षी नेताओं में भय पैदा करने के प्रयासों की निंदा की. यह कथित घटना तब घटी जब ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में एक दिवंगत टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने गई थीं. टीएमसी नेताओं ने भाजपा समर्थकों के शामिल होने का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों का खंडन करते हुए किसी भी प्रकार की हिंसा की निंदा की है.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी : स्वतंत्र जांच की मांग, 17 अगस्त को सुनवाई