अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की स्वतंत्र जांच की मांग वाली 4 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है, अब सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को सुनवाई होगी.चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच को एक वकील ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हो रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता संयुक्त राष्ट्र में एक कार्यक्रम में शामिल होने गए हैं, इसलिए सुनवाई को टाल दिया जाए. बेंच ने सुनवाई टालने की अर्जी पर सुनवाई करने पर सोमवार को सहमति जताई.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच को वकील ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार का मामले में पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए डेलीगेशन के साथ संयुक्त राष्ट्र गए हैं. पीठ ने सवाल किया कि क्या मामले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं. वकील ने कहा, 'हां, कृपया इनपर अगले हफ्ते सुनवाई करें.' बेंच इस अनुरोध पर विचार करने पर सहमत हो गई.
जांच के लिए बनी नई एसआईटी
सर्वोच्च न्यायालय ने 27 जुलाई को अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए पुलिस महानिरीक्षक (IGP) किरण एस. की अगुवाई में चार सदस्यों वाली एसआईटी के गठन का संज्ञान लिया. पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से जांच टीम में एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करने के लिए कहा था. पीठ ने विशेष जांच टीम (SIT) को दो हफ्ते में स्थिति रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया.
मामले में राजनीतिक बयानबाजी तेज
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले की जांच ने फिर रफ्तार पकड़ी है. नई एसआईटी के गठन के बाद जांच तेजी से आगे बढ़ रही है. इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. विपक्ष सरकार पर आरोप लगा रहा है. 7 अगस्त को सपा सांसदों ने संसद परिसर के बाहर प्रदर्शन कर अयोध्या स्थित राम मंदिर चढ़ावा अनियमितता मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी.
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सपा ने सरकार पर साधा निशाना
सपा सांसदों ने आरोप लगाया कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा यह मामला बेहद गंभीर है, लेकिन सरकार इस पर चर्चा से बच रही है. सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा था कि जब तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने कहा था कि भगवान राम के नाम पर जुटाए गए धन का एक-एक पैसा मंदिर तक पहुंचना चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए.
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