महाभारत के बारे में तो आपने सुना ही होगा. इस महान ग्रंथ में एक प्रसंग है जहां पर यक्ष-युधिष्ठिर संवाद होता है. ये प्रसंग इस पूरे महाकाव्य में अपनी एक अलग ही जगह रखता है. इस प्रसंग में युधिष्ठिर के चारों भाई अपनी गलती के कारण मारे गए थे लेकिन युधिष्ठिर ने अपनी समझदारी के कारण उन्हें पुनर्जीवित करा लिया.

दरअसल जब पांडव अज्ञातवास में थे तब एक दिन युधिष्ठिर ने नकुल को पानी लेने के लिए भेजा. नकुल को तलाब ढूंढने में काफी कठिनाई हुई. नकुल जब तलाब के पास पहुंचा तब वो ना केवल थक गया था बल्कि प्यासा भी था.

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ऐसे में उसने पानी पीना चाहा लेकिन इस तलाब में एक यक्ष भी रहता था. यक्ष ने नकुल को पानी पीने से रोका और कहा कि यह पानी तुम तभी पी सकते हो जब मेरे सवालों का जवाब दे दोगे.

नकुल ने इस चेतावनी को अनसुना कर दिया और तलाब का पानी पी लिया. पानी पीते ही नकुल की जान चली गई. इसके बाद जब काफी देर तक नकुल वापस नहीं पहुंचा तो युधिष्ठिर ने सहदेव को भेजा लेकिन उसने भी नकुल की तरह ही यक्ष की बातों को अनसुना कर दिया.

वह भी तलाब किनारे गिर पड़ा. इसके बाद अर्जुन और फिर भीम भी तलाब पर पहुंचे लेकिन सभी एक एक करके यक्ष की बातों को अनसुना करते रहे और पानी पीकर जान गंवाते रहे.

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आखिर में युधिष्ठिर भी तलाब पर पहुंचे. उनसे भी यक्ष ने सवाल किए. यक्ष ने पूछा कि पृथ्वी से भारी क्या है? युधिष्ठिर ने कहा कि पृथ्वी से भारी यानी बढ़ कर है मां.

इसके बाद यक्ष ने पूछा कि आकाश से ऊंचा क्या है? धर्मराज युधिष्ठिर ने कहा- पिता का कद आकाश से भी ऊंचा होता है.

यक्ष ने अगला सवाल किया कि वायु से तेज क्या चलता है? युधिष्ठिर ने कहा मन की गति वायु से भी तेज होती है.

यक्ष ने पूछा कि तिनकों से अधिक संख्या किसकी है. युधिष्ठिर ने कहा कि चिंताओं की संख्या तिनकों से अधिक होती है.

यक्ष ने पूछा कि सो जाने पर भी आखें कौन नहीं मूंदता? इस पर युधिष्ठिर ने कहा कि मछली सोने पर भी आखें नहीं मूंदती.

इस प्रकार यक्ष ने जो भी सवाल किए युधिष्ठिर ने उनका सही जवाब दे दिया. ऐसा कहा जाता है कि 100 सवाल यक्ष ने पूछे थे और युधिष्ठिर ने सभी सवालों के सही जवाब दिए. इस बात से खुश होकर यक्ष ने युधिष्ठिर से सभी भाइयों को जिंदा कर दिया और पानी भी पीने दिया.