सिर को ढकना भारतीय संस्कृति की सबसे पुरानी परंपराओं में शामिल है. फिर चाहे पुरुष सिर पर पगड़ी बांधे या महिलाएं साड़ी का पल्लू ओढ़े या श्रद्धालु मंदिर में कपड़ा रखें यह भाव सम्मान, गरिमा और अपनेपन का एक तरीका है.

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हालांकि इस प्रथा का मतलब अलग-अलग क्षेत्रों, समुदायों और परिस्थितियों बदलता रहता है.

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राजस्थान में सिर को ढकने की परंपरा

  • राजस्थान में पुरुष आमतौर पर पगड़ी या सफा के नाम से जाना जाता है. 
  • प्रत्येक रंग, शैली और कपड़ा जाति, क्षेत्र या अवसर को दर्शाता है. 
  • त्योहार के मौके पर चमकीले रंग, शोक के लिए सफेद रंग की पगड़ी.
  • पगड़ी को सम्मान का प्रतीक माना जाता है. इसे सार्वजनि रूप से उतारना अपमान के रूप में देखा जाता है. 

पंजाब  दुपट्टा और सिख पगड़ी

  • सिख धर्म में पुरुष धार्मिक अनिवार्यता के रूप में पगड़ी (दस्तार) पहनते हैं, जो समानता, आत्म सम्मान और आध्यात्मिक अनुशासन का प्रतीक माना जाता है. 
  • महिलाएं अक्सर प्रार्थना के दौरान ईश्वर के सामने विनम्रता के प्रतीक के रूप में अपने सिर को दुपट्टे से ढक लेती हैं. 
  • शादियों में भी सम्मान के प्रतीक के रूप में सिर ढकना जरूरी है. 

गुजरात ओढ़नी के साथ घाघरा-चोली

  • गुजरात में परंपरागत रूप से महिलाएं बड़ों के सामने सम्मान के रूप में अपने सिर को ओढ़नी से ढकती हैं. 
  • ग्रामीण गुजरात में यह विनम्रता और वैवाहिक स्थिति का भी प्रतीक है. 

बंगाल साड़ी का पल्लू एक गरिमा और परंपरा के रूप में

  • महिलाएं अपने सिर को पल्लू से ढकती हैं, खासकर अनुष्ठानों के दौरान और बड़ों के सामने. 
  • शादियों में दुल्हनें शर्म और सम्मान के नजरिए से अपने सिर ढकती हैं. 
  • इसका संबंध मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करना भी है. 

महाराष्ट्र नौवारी साड़ी और सिर ढकने का रिवाज

  • पारंपरिक नौवारी साड़ी पहने महिलाएं धार्मिक समारोहों के दौरान अपने सिर को ढकती हैं.
  • पुरुष त्योहारों, शादियों या जुलूसों के दौरान फेटा (एक तरह की पगड़ी) पहनते हैं, जो सम्मान का प्रतीक है.

उत्तर प्रदेश और बिहार (घूंघट)

  • ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाएं बड़ों के सम्मान में घूंघट की परंपरा का पालन करती हैं. 
  • किसी भी तरह के समारोहों में दुल्हनें अनुष्ठानिक पवित्रता के हिस्से के रूप में  अपने सिर को पूरी तरह से ढक लेती हैं. 

दक्षिण भारत में सिर ढकने की परंपरा

  • महिलाएं मंदिर दर्शन के दौरान अपने सिर को साड़ी के पल्लू से ढकती हैं.
  • कुछ मंदिर अनुष्ठानों में पुरुष अंगवस्त्रम बांधते हैं या अपने सिर को ढकते हैं. 
  • केरल में ईसाई महिलाएं पारंपरिक रूप से चर्च में प्रार्थना के दौरान अपने सिर को सफेद रंग के घूंघट से ढकती हैं.

भारत के शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन सिर को ढकने का चलन बेसक कम हो लेकिन यह अभी भी धार्मिक अनुष्ठानों, शादियों और धार्मिक स्थलों में प्रचलित है.

कई लोगों के लिए यह उनकी पहचान और सांस्कृतिकता का प्रतीक है. आजकल फैशन डिजाइनर भी पगड़ी और दुपट्टे को स्टाइल स्टेटमेंट के रूप में शामिल करते हैं. 

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