दुनिया के नक्शे पर एक छोटा सा स्थान, चीन के तट से चंद मील दूर बसा एक सुदूर द्वीप बीगन. यहां सन्नाटा है, समंदर की लहरों का शोर है और इतिहास की कड़वी यादें हैं. लेकिन साल में एक रात ऐसी आती है, जब इस खामोश द्वीप के एक छोटे से मंदिर, 'वुवेई लिंग' (Wuwei Ling Temple) में तिल रखने की जगह नहीं होती.
लोग यहां दान-पुण्य करने या जोर-जोर से मंत्र पढ़ने नहीं आते. वे यहां आते हैं एक बहुत ही साधारण, लेकिन रहस्यमयी काम करने के लिए यानी सोने के लिए.
जी हां, आपने सही पढ़ा. यह दुनिया का शायद इकलौता ऐसा मंदिर है जहां 'नींद' ही सबसे बड़ी प्रार्थना है. रायटर्स की एक हालिया रिपोर्ट ने जब इस परंपरा की परतों को खोला, तो जो सामने आया वह किसी जादुई यथार्थवाद (Magical Realism) की फिल्म जैसा लगता है.
वो एक रात, जब मंदिर बन जाता है 'सपनों की प्रयोगशाला'
कल्पना कीजिए, एक पुराने मंदिर का हॉल, धुआं उठती अगरबत्तियां और जमीन पर एक-दूसरे से सटकर लेटे हुए सैकड़ों लोग. कोई अपनी पुरानी फटी रजाई लाया है, तो कोई आधुनिक स्लीपिंग बैग. हर कोई अपनी आँखें मूंदकर बस एक 'इशारे' का इंतज़ार कर रहा है.
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर के देवता जिउली के नौ अमर (Nine Immortals of Jiuli) साल में सिर्फ एक बार यहां आते हैं. वे केवल उस व्यक्ति से बात करते हैं जो गहरी नींद में होता है. यहां 'सपना' कोई दिमागी फितूर नहीं, बल्कि देवताओं द्वारा भेजा गया एक 'इनबॉक्स मैसेज' माना जाता है.
तूफान की वो कहानी जिसने बीगन की किस्मत बदल दी
इस परंपरा के पीछे की कहानी उतनी ही दिलचस्प है जितना कि खुद यह मंदिर. ये नौ अमर देवता असल में चीन के फुजियान प्रांत के रहने वाले भाई-बहन माने जाते हैं. लोककथा कहती है कि चंद्र नववर्ष (Lunar New Year) के 29वें दिन ये देवता अपने चाचा से मिलने इस द्वीप पर आए थे.
वापसी के वक्त एक ऐसा भयंकर समुद्री तूफान आया कि देवताओं को एक अतिरिक्त दिन यहीं रुकना पड़ा. बस, वही एक दिन बीगन के लोगों के लिए वरदान बन गया. आज स्थिति यह है कि चीन के फुजियान में लोग साल के 364 दिन सपने मांग सकते हैं, लेकिन इस छोटे से द्वीप पर वह खिड़की साल में सिर्फ एक बार खुलती है. और इसी 'सीमिक वरदान' ने इस मंदिर को पूरी दुनिया में वायरल कर दिया है.
रोंगटे खड़े कर देने वाली सच्ची दास्तां: यांग की कहानी
60 साल की यांग जुई-युन, जो यहां एक छोटा सा रेस्टोरेंट चलाती हैं, के लिए यह कोई अंधविश्वास नहीं है. आज से 10 साल पहले उनकी बेटी पढ़ाई के लिए अमेरिका जा रही थी. एक मां का दिल घबरा रहा था. यांग उस रात मंदिर के फर्श पर सोईं.
उन्होंने रॉयटर्स को बताया, 'मैंने सपने में अंग्रेजी में 'Hello-Hello' सुना. फिर मुझे एक धुंधली सी तस्वीर दिखी, एक जोड़ा हाथ पकड़े खड़ा है और उनके साथ दो छोटे बच्चे हैं.' उस वक्त यांग को समझ नहीं आया.
लेकिन सालों बाद जब उनकी बेटी की शादी हुई और उसने अमेरिका में जुड़वां बेटियों को जन्म दिया, तो चमत्कार हुआ. जब वे बच्चे पहली बार अपनी नानी से मिलने मात्सू के समुद्र तट पर आए, तो यांग के पैरों तले जमीन खिसक गई. उनकी बेटी और दामाद बच्चों का हाथ पकड़कर ठीक वैसे ही चल रहे थे जैसा यांग ने एक दशक पहले सपने में देखा था.
करियर, शादी और पैसा: भगवान से सीधा 'कंसल्टेशन'
मंदिर के मानद अध्यक्ष चेन शिह-तिएन कहते हैं कि समय के साथ लोगों की मुरादें बदल गई हैं. पुराने जमाने में लोग खेती या सेहत के बारे में पूछते थे. आज का दौर 'कट-थ्रोट कॉम्पिटिशन' का है. जैसे-
- करियर की उलझन: 'क्या मुझे यह नौकरी छोड़नी चाहिए?'
- बिजनेस का जोखिम: 'क्या इस स्टॉक में पैसा लगाना सही है?'
- शादी का सवाल: 'क्या यह लड़का/लड़की मेरे लिए सही है?'
हैरानी की बात यह है कि यहां आने वालों में सिर्फ बुजुर्ग नहीं, बल्कि ताइवान के पढ़े-लिखे युवा और टेक-प्रोफेशनल्स भी शामिल हैं. वे इसे 'स्पिरिचुअल थेरेपी' की तरह देखते हैं.
मात्सू द्वीप: बारूद की गंध से पर्यटन की खुशबू तक
यह मंदिर जिस मात्सू द्वीपसमूह में है, उसका इतिहास खून से सना है. 1949 के गृहयुद्ध के बाद यह इलाका चीन और ताइवान के बीच 'फ्लैशप्वाइंट' रहा है. यहां की पहाड़ियों में आज भी वो बंकर मौजूद हैं जहां कभी सैनिक तोपें तैनात रखते थे.
लेकिन आज मात्सू की पहचान बदल रही है. यहां का नीला समंदर (Blue Tears), दुर्लभ पक्षी और अब यह 'ड्रीम-सीकिंग' मंदिर इसे ग्लोबल टूरिज्म मैप पर ले आया है. ताइवान की सरकार भी अब इसे 'कल्चरल हेरिटेज' के तौर पर प्रमोट कर रही है.
अगर आप जाना चाहें: कुछ जरूरी बातें
अगर आप भी अपनी किस्मत का सपना देखना चाहते हैं, तो याद रखें, कोई वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं है. यहां अमीर हो या गरीब, सबको फर्श पर ही सोना पड़ता है. स्थानीय लोग कहते हैं कि अगर मन में शक हो, तो सपना नहीं आता. बीगन एक छोटा द्वीप है, यहां पहुंचने के लिए आपको ताइपे से छोटी फ्लाइट या फेरी लेनी पड़ती है.
क्या यह सच है? या यह सिर्फ हमारे अवचेतन मन (Subconscious Mind) का खेल है? मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि जब हम किसी समस्या को लेकर बहुत ज्यादा सोचते हैं, तो हमारा दिमाग नींद में उसके संभावित परिणाम 'सिमुलेट' करता है. लेकिन बीगन के उन श्रद्धालुओं के लिए, यह विज्ञान नहीं, एक भरोसा है. एक ऐसा भरोसा जो उन्हें साल भर की चुनौतियों से लड़ने की ताकत देता है.
आखिरकार, एक ऐसी दुनिया में जहां हर सवाल का जवाब गूगल (Google) के पास है, कुछ जवाबों के लिए अपनी आंखें बंद करना और देवताओं के 'कॉल' का इंतजार करना कितना सुकूनदेह हो सकता है!
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