Som Pradosh Vrat 2026 Paran Time: सोमवार, 30 मार्च 2026 को मार्च महीने और चैत्र महीने का अंतिम प्रदोष व्रत है. इस दिन शिव भक्तों ने सोम प्रदोष व्रत रखा है. भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस व्रत को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

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मान्यता है कि, प्रदोष व्रत के दिन व्रत रखकर शिवजी की पूजा करने से भक्तों को जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है. लेकिन कोई भी व्रत तभी सफल और संपन्न माना जाता है, जब पूजा-पाठ के साथ ही व्रत का पारण भी विधिपूर्वक किया जाए.

प्रदोष व्रत के नियम

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एकादशी की तरह की प्रदोष व्रत के नियम भी एक दिन पहले से ही शुरू हो जाता है. प्रदोष व्रत से एक दिन पूर्व भक्तों को सुबह स्नानादि के बाद पूजा करनी चाहिए. इसके बाद पूरे दिन सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और लहसुन-प्याज का त्याग करना चाहिए. इसके बाद प्रदोष काल के दिन भी सुबह उठकर स्नान करें और दैनिक पूजा-पाठ कर व्रत का संकल्प लें. प्रदोष काल की पूजा सूर्योदय के बाद प्रदोष काल में करने की मान्यता है. प्रदोष व्रत में प्रदोष काल की पूजा से पहले भक्तों को निराहार रहना चाहिए. पूजा के बाद कई लोग फलाहार ग्रहण करते हैं. लेकिन इसके बावजूद अगले दिन व्रत का पारण करना जरूरी होता है. पारण की विधि के बाद ही प्रदोष व्रत पूर्ण होता है.

31 मार्च को सोम प्रदोष व्रत का पारण

सोम प्रदोष व्रत 30 मार्च को है और अगले दिन यानी मंगलवार 31 मार्च को सोम प्रदोष व्रत का पारण किया जाएगा. हालांकि प्रदोष व्रत में पूजा के बाद भी कई लोग पारण कर लेते हैं. ऐसे में आप 30 मार्च को प्रदोष काल की पूजा के बाद फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं. 

आमतौर पर पारण सूर्योदय के बाद ही करना शुभ होता है. सोम प्रदोष व्रत का पारण 31 मार्च, सुबह 6 बजकर 55 मिनट के बाद किया जाएगा. व्रत रखने वाले भक्त इस समय के बाद अपना व्रत खोल सकते हैं.

पारण में इन बातों का रखें ध्यान

सोम प्रदोष व्रत का पारण या व्रत खोलते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे कि व्रत का पूरा फल प्राप्त हो सके. व्रत पारण के समय भोग या फल आदि से ही अपना व्रत खोलें. पारण से पहले भगवान शिव की पूजा-अर्चना करें और ब्राह्मणों के लिए दान-दक्षिणा निकालें. इसके बाद ही स्वयं भोजन करें. पारण वाले दिन भी लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए.

मान्यता है कि विधि-विधान से सोम प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. इसलिए पारण के समय नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है.

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