Siddhivinayak Corridor: मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक मंदिर के 500 करोड़ रुपये की लागत वाले कॉरिडोर पुनर्विकास परियोजना के पहले चरण का काम जल्द शुरू होने जा रहा है. हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भूमिपूजन किया. इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत मंदिर न्यास के पदाधिकारी उपस्थित रहे.
कॉरिडोर की जरूरत क्यो ?
करीब 225 वर्ष पुराने इस मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, जबकि संकष्टी, अंगारकी और गणेशोत्सव जैसे अवसरों पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है. बढ़ती भीड़, लंबी कतारों और पार्किंग की कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने मंदिर परिसर के व्यापक आधुनिकीकरण का निर्णय लिया है.
कॉरिडोर विकास के पहले चरण में क्या बनेगा?
परियोजना के पहले चरण में नया भव्य प्रवेश द्वार, मंदिर परिसर के भीतर और बाहर स्टोन क्लैडिंग, उत्तरी हिस्से में छत और फर्श का निर्माण तथा 120 कारों की क्षमता वाला बेसमेंट पार्किंग विकसित किया जाएगा. आगामी चरणों में मौसम से सुरक्षित मार्ग, आधुनिक कतार प्रबंधन प्रणाली, सुरक्षित पैदल मार्ग, आपातकालीन सहायता केंद्र और अन्य सुविधाएं तैयार की जाएंगी.
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क्यों है उद्धव की शिवसेना और स्थानीय लोगो का विरोध ?
सिद्धिविनायक कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित 120 वाहनों की पार्किंग के लिए नर्दुल्ला टैंक मैदान के उपयोग को लेकर स्थानीय नागरिकों और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया है. उनका कहना है कि यह मैदान स्थानीय बच्चों और बुजुर्गों के लिए महत्वपूर्ण खुला स्थान है, इसलिए पार्किंग के लिए वैकल्पिक जगह तलाशनी चाहिए. सरकार का लक्ष्य अगले दो वर्षों में परियोजना को पूरा करना है.
आचार्य पवन त्रिपाठी ने बताया कि, आज भी आसानी से लोगो को गणेश मंदिर में दर्शन मिलता है. BMC ने 500 करोड़ रुपए आवंटित किया गया है जिसमें मंदिर सिर्फ लाभार्थी हैं. प्रवेश द्वार बनाया जाएगा, 120 वाहनों की पार्किंग बनाई जाएगी. ये पहला चरण है. आगे दूसरे और तीसरे चरण में और भी विकास कार्य होगा. श्रद्धालुओं के लिए सुविधा जनक कॉरिडोर होगा. महाकालेश्वर मंदिर कॉरिडोर का डिजाइन करने वाली टीम ने सिद्धिविनायक मंदिर कॉरिडोर बनाया है.
आचार्य पवन त्रिपाठी ने बताया की सांस्कृतिक विरासत के साथ विकास को साथ लेकर कार्य किया जाएगा. सिद्धिविनायक मंदिर से दादर रेलवे स्टेशन के बीच AC बस चलाया गया. मंदिर के पास मेट्रो स्टेशन बनने से भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है. अगले दो साल के कार्य के लिए कॉरिडोर की रूप रेखा बनी हुई है. भक्तों की सुविधा का पूरा ख़याल रखते हुए निर्माण कार्य होगा.
कॉरिडोर को लेकर उद्धव की शिवसेना और स्थानीय लोगो का विरोध पर जवाब देते हुए कोषाध्यक्ष पवन त्रिपाठी ने कहा कि, मंदिर पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.
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