Clapping In Front Of Shivling: सनातन धर्म में देवों के देव महादेव की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है. भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है, क्योंकि वे मात्र एक लोटा जल और बेलपत्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं. शिव मंदिरों में अमूमन हम देखते हैं कि श्रद्धालु पूजा या आरती के दौरान शिवलिंग के सामने खड़े होकर जोर-जोर से ताली बजाते हैं. कुछ लोग इसे भक्ति का हिस्सा मानते हैं, तो कुछ इसे परंपरा का नाम देते हैं.

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लेकिन क्या शिवलिंग के सामने ताली बजाना वास्तव में सही है? ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसका क्या महत्व है और इसके क्या लाभ या नुकसान हो सकते हैं? आइए देश के जाने-माने ज्योतिषियों और शास्त्रों के अनुसार इसका वास्तविक महत्व विस्तार से समझते हैं.

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शिवलिंग के सामने ताली बजाने की पौराणिक मान्यता

पौराणिक कथाओं और सनातन परंपरा के अनुसार, मंदिर में ताली बजाने की प्रथा के पीछे मुख्य रूप से दो कारण माने जाते हैं:

भगवान का ध्यान आकर्षित करना: ऐसा माना जाता है कि जब भक्त मंदिर में प्रवेश करता है, तो ताली बजाकर या घंटा बजाकर वह ईश्वर के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है. यह इस बात का प्रतीक है कि 'हे प्रभु, मैं आपके द्वार पर आया हूं, मेरी पुकार सुनिए.'

नकारात्मक ऊर्जा का नाश: शास्त्रों के अनुसार, ताली की ध्वनि से आसपास के वातावरण में मौजूद नकारात्मक शक्तियां और तामसिक ऊर्जा दूर भागती है. इससे मंदिर परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, शिवलिंग के सामने तीन बार ताली बजाने का नियम

ज्योतिष शास्त्र और शिव पुराण के जानकारों के अनुसार, शिवलिंग के पास मनमाने ढंग से ताली बजाना वर्जित माना गया है. यदि आप ताली बजाना ही चाहते हैं, तो इसके लिए 'तीन ताली' का एक विशेष नियम और महत्व बताया गया है.

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, लंकापति रावण ने भी महादेव को प्रसन्न करने के लिए तीन बार ताली बजाकर स्तुति की थी, जिससे उसे लंका का राजपाठ और अपार शक्तियां प्राप्त हुईं.

जानें तीन तालियों का रहस्य और लाभ:

  • पहली ताली (उपस्थिति दर्ज कराना): पहली ताली इस बात का संकेत है कि आप भगवान शिव के दरबार में आ चुके हैं. इससे महादेव का ध्यान भक्त की ओर आकर्षित होता है.
  • दूसरी ताली (मनोकामना पूर्ति): दूसरी ताली बजाने का उद्देश्य अपनी इच्छा या मनोकामना को भोलेनाथ के समक्ष रखना है. मान्यता है कि इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है.
  • तीसरी ताली (शरण और सुरक्षा): तीसरी ताली इस बात का प्रतीक है कि भक्त स्वयं को पूरी तरह से महादेव के चरणों में समर्पित कर रहा है. ऐसा करने से जातक को जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है और भगवान शिव की कृपा दृष्टि सदैव बनी रहती है.

क्या शिवलिंग के पास जोर से ताली बजाना गलत है? (सावधानी और निषेध)

जहां एक तरफ तीन बार नियमपूर्वक ताली बजाने के लाभ बताए गए हैं, वहीं ज्योतिषियों ने शिवलिंग के बिल्कुल करीब जाकर जोर-जोर से ताली बजाने या शोर मचाने को लेकर कड़ी चेतावनी भी दी है. इसके पीछे मुख्य धार्मिक और व्यावहारिक कारण निम्नलिखित हैं:

महादेव की समाधि में विघ्न: भगवान शिव को तंत्र, मंत्र और ध्यान का देवता माना जाता है. वे अक्सर गहरी समाधि (ध्यान) में लीन रहते हैं. शिवलिंग के पास जाकर तेज आवाज में ताली बजाने या चिल्लाने से महादेव के ध्यान में विघ्न पड़ता है, जिसे शास्त्रों में अपराध माना गया है. ऐसा करने से पुण्य मिलने के बजाय दोष लग सकता है.

आरती के समय की अनुमति: शास्त्रों के अनुसार, जब मंदिर में सामूहिक आरती हो रही हो, तब ढोल-नगाड़ों और शंख की ध्वनि के साथ ताली बजाना शुभ माना जाता है. लेकिन एकांत पूजा या जल चढ़ाते समय शांति बनाए रखना अनिवार्य है.

भक्तों को क्या करना चाहिए?

आप भी शिव मंदिर जाते हैं, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भक्ति हमेशा शालीनता और मर्यादा में होनी चाहिए. शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करते समय पूरी तरह शांत रहें और मन ही मन 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें.

आप ताली बजाना चाहते हैं, तो शिवलिंग से थोड़ी दूरी बनाकर, अत्यंत शालीनता से केवल तीन बार ताली बजाएं. मंदिर की शांति को भंग न करें ताकि महादेव की कृपा आप पर और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे.

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