Sawan Putrada Ekadashi 2026: सावन में पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 और 24 अगस्त दोनों दिन है. पंचांग के अनुसार जब एकादशी दोनों दिन उदयातिथि विद्यमान हो तो गृहस्थ जीवन वालों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए. मूल रूप से ये व्रत संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है लेकिन इसमें पुत्र का वर्णन है तो क्या बेटी की इच्छा रखने वालों को इस व्रत में क्या करना चाहिए.
पुत्रदा एकादशी व्रत क्या सिर्फ पुत्र प्राप्ति के लिए ?
पुत्रदा एकादशी की कथा में संतानहीन राजा सुकेतुमान और उनकी पत्नी का वर्णन मिलता है. पद्म पुराण में भगवान विष्णु इस एकादशी को पुत्रदा बताते हैं और राजा को पुत्र प्राप्ति के लिए ये व्रत करने की सलाह दी जाती है. कथा में भी राजा की इच्छा विशेष रूप से पुत्र प्राप्ति की है और व्रत के फलस्वरूप उन्हें तेजस्वी पुत्र प्राप्त होता है. इसलिए शास्त्रीय कथा के स्तर पर पुत्रदा एकादशी का मूल फल पुत्र प्राप्ति से जुड़ा हुआ है.
क्या बेटी की कामना करने वाले यह व्रत कर सकते हैं?
भगवान विष्णु की उपासना और एकादशी व्रत करने में बेटी की कामना रखने वाले दंपती के लिए कोई धार्मिक निषेध नहीं है. बेटी की कामना करने वाले दंपती सं स्वस्थ एवं सद्गुणी संतान का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की पूजा करें. विधिवत व्रत करें. पुत्री की इच्छा है तो संकल्प में अपनी मनोकामना भगवान के सामने प्रार्थना के रूप में रखें. मनुस्मृति 9.130 में कहा गया है पुत्रेण दुहिता समा, अर्थात बेटी पुत्र के समान मानी गई है.
बेटी की कामना हो तो क्या करें?
दंपती पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु का पूजन, एकादशी व्रत, विष्णु मंत्र का जाप और दान-पुण्य कर सकते हैं. माता लक्ष्मी केवल धन की देवी नहीं हैं. वैदिक और पौराणिक परंपरा में लक्ष्मी को समृद्धि, सौभाग्य, ऐश्वर्य, उर्वरता और गृहस्थ सुख से जोड़ा जाता है. भगवान विष्णु की पत्नी होने के कारण उनकी पूजा विष्णु उपासना के साथ की जाती है.
माता लक्ष्मी को कमल या सफेद या लाल पुष्प अर्पित करें और भगवान विष्णु को तुलसी दल चढ़ाएं. ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें. ध्यान रखें संतान चाहे पुत्र हो या पुत्री, धार्मिक दृष्टि से उसका स्वस्थ, सद्गुणी और सुखी होना ही सबसे महत्वपूर्ण कामना मानी जानी चाहिए.
एकादशी पर संतान प्राप्ति के लिए तुलसी के उपाय
तुलसी दल चढ़ाएं - स्नान के बाद भगवान विष्णु को स्वच्छ तुलसी दल अर्पित करें. विष्णु पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना गया है. तुलसी दल अर्पित करते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप कर सकते हैं.
तुलसी की परिक्रमा करें - एकादशी के दिन तुलसी माता की श्रद्धापूर्वक परिक्रमा करने की परंपरा है. परिक्रमा के दौरान अपनी मनोकामना के बजाय पहले भगवान विष्णु से स्वस्थ, सुखी और मंगलमय जीवन की प्रार्थना करना उचित माना जाता है.
तुलसी के पास विष्णु मंत्र का जाप करें - शाम के समय तुलसी के पास बैठकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. सामर्थ्य के अनुसार 108 बार जाप किया जा सकता है.
FAQ
1.पुत्रदा एकादशी पर बेटी की इच्छा हो तो भगवान विष्णु से क्या प्रार्थना करें?दंपती भगवान विष्णु के सामने अपनी इच्छा रखते हुए स्वस्थ और सद्गुणी पुत्री की कामना कर सकते हैं. प्रार्थना में संतान के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु, संस्कार और सुखी जीवन की कामना करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है.
2.क्या पुत्रदा एकादशी पर संतान की कामना से लक्ष्मी-नारायण की पूजा करनी चाहिए?हां. इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा करना शुभ माना जाता है. भगवान विष्णु को तुलसी दल और माता लक्ष्मी को पुष्प अर्पित कर श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है. संतान सुख के लिए दंपती मिलकर भी पूजा और प्रार्थना कर सकते हैं.
3. बेटी की कामना के लिए पुत्रदा एकादशी पर कौन सा मंत्र जाप करें?भगवान विष्णु की उपासना के लिए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया जा सकता है. माता लक्ष्मी की पूजा करते समय “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप भी किया जा सकता है. मंत्र जाप श्रद्धा और नियमितता के साथ करना चाहिए.
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