PM Modi की जन्म कुंडली से जानेंगे इस चर्चा की हकीकत. प्रधानमंत्री की कुंडली में मौजूद प्रमुख योगों और दशाओं की व्याख्या और उदाहरणों के साथ समझने की कोशिश करेंगे कि क्या ऐसा संभव हो सकता है?

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नरेंद्र मोदी की जन्म कुंडली में छिपे हैं कौन से योग?

नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को वडनगर, गुजरात में हुआ था. विभिन्न स्रोतों के अनुसार जन्म समय 11:00 AM से 12:09 PM के बीच है, लेकिन अधिकांश ज्योतिषी वृश्चिक लग्न (Scorpio Ascendant) को मानते हैं. कुंडली में ग्रहों की स्थिति मजबूत है, जो राजनीतिक सफलता और वैश्विक प्रभाव का संकेत देती है. यहां प्रमुख योगों की को समझते हैंड

रूचक महापुरुष योग: लग्न में स्वराशि का मंगल (Mars in Scorpio) इस योग का निर्माण करता है. यह योग अपार साहस, नेतृत्व और युद्ध-नीति जैसी क्षमताएं प्रदान करता है.

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उदाहरण: 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी की आक्रामक रणनीति और जीत इस योग का प्रमाणिक फल थी, जहां मंगल की ऊर्जा ने उन्हें विपक्ष पर हावी होने में मदद की. 2026 में यह योग वैश्विक शांति प्रयासों (जैसे यूक्रेन-रूस मध्यस्थता) में मजबूत भूमिका निभा सकता है, क्योंकि मंगल शांति समझौतों में निर्णायक कार्रवाई का प्रतीक है.

नीचभंग राजयोग: चंद्रमा (Moon) वृश्चिक में नीच का है, लेकिन लग्नेश मंगल से नीचभंग होता है. यह योग चुनौतियों से ऊपर उठकर राजसी पद दिलाता है.

उदाहरण: नरेंद्र मोदी का चाय बेचने से प्रधानमंत्री बनना इस योग का क्लासिक उदाहरण है. नीच चंद्रमा शुरुआती संघर्ष दिखाता है, लेकिन भंग से वैश्विक प्रसिद्धि मिली. 2026 में यह वैश्विक आलोचनाओं (जैसे मानवाधिकार मुद्दे) को पार कर सम्मान प्राप्त करने में सहायक हो सकता है.

गजकेसरी योग: गुरु (Jupiter) और चंद्रमा की स्थिति से बनता है. यह योग बुद्धिमत्ता, लोकप्रियता और अंतरराष्ट्रीय सम्मान देता है.

उदाहरण: G20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका, जहां भारत को वैश्विक मंच पर नेतृत्व मिला, इस योग का प्रभाव था. नोबेल जैसे पुरस्कार शांति प्रयासों से जुड़े हैं, और यह योग 2026 में ऐसे फल दे सकता है यदि कोई बड़ा समझौता हो.

चंद्र-मंगल योग और महालक्ष्मी योग: चंद्र-मंगल की युति भावनात्मक शक्ति और धन-सम्मान देती है.

उदाहरण: प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति में रूस-यूक्रेन जैसे मुद्दों पर संतुलित रुख इस योग का फल है, जो भावनात्मक अपील और निर्णायकता का मिश्रण है. महालक्ष्मी योग वैश्विक प्रभाव बढ़ाता है, जैसे भारत की आर्थिक उन्नति. ये समस्त योग मोदी को वैश्विक मंच पर मजबूत बनाते हैं, लेकिन ज्योतिष में फल दशाओं पर निर्भर करता है.

2026 में ग्रह दशाओं का प्रभाव: व्याख्या और उदाहरण

पीएम मोदी की कुंडली में विंशोत्तरी दशा प्रणाली के अनुसार, मंगल महादशा (Mars Mahadasha) 2021 से 2028 तक चल रही है.  यह दशा ऊर्जा, कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सफलता देती है.

2026 में विशेष दशाएं:

बुध अंतरदशा (Mercury Antardasha, मई 2026 तक): बुध बुद्धि और संचार का ग्रह है. यह सार्वजनिक छवि और राजनयिक प्रयासों को बढ़ावा देगा.

उदाहरण: 2019 में बुध प्रभाव ने चुनावी अभियान में सफलता दी; 2026 में यह वैश्विक वार्ताओं (जैसे G20 या जलवायु समझौते) में नोबेल-योग्य योगदान दे सकता है.

केतु अंतरदशा (Ketu Antardasha, अक्टूबर 2026 तक): केतु आध्यात्मिकता और अप्रत्याशित परिवर्तनों का प्रतीक है.

उदाहरण: 2001 गुजरात भूकंप के बाद मोदी की भूमिका केतु प्रभाव से जुड़ी थी, जहां अप्रत्याशित चुनौती से नेतृत्व उभरा. 2026 में यह वैश्विक संकटों में मध्यस्थता के रूप में फल दे सकता है, लेकिन राजनीतिक दबाव भी ला सकता है.

शुक्र अंतरदशा (Venus Antardasha, दिसंबर 2026 तक): शुक्र कूटनीति और शांति का ग्रह है. उदाहरण: 2015 में शुक्र प्रभाव ने विदेश यात्राओं में सफलता दी; 2026 में यह शांति समझौतों (जैसे मध्य पूर्व या यूक्रेन) में नोबेल जैसा सम्मान दिला सकता है.

गोचर में जुपिटर का 8वें घर में गोचर (मई 2025 से मई 2026) गहन परिवर्तन दिखाता है, जो शांति प्रयासों से जुड़ा हो सकता है. हालांकि, सितंबर 2025 से सितंबर 2026 तक चुनौतियां भी हैं. लेकिन मंगल-गुरु युति से 2026 में सफलताएं, वैश्विक प्रभाव मजबूत होता दिख रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व 2026 तक मजबूत, लेकिन चुनौतियां रह रहकर आती रहेंगी, लेकिन मंगल दशा से परिवर्तन भी आएगा. 2026 में पीएम मोदी के नेतृत्व में जियोपॉलिटिकल में बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं. ये भविष्यवाणियां प्लैनेटरी साइकिल्स पर आधारित हैं, जो नोबेल जैसी संभावना को मजबूत बनाती हैं यदि शांति प्रयास सफल हों.

क्या यह संभव है? 

ज्योतिष संभावनाएं बताता है, लेकिन फल कर्म और घटनाओं पर निर्भर है. प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति नोबेल के लिए आधार देती है, लेकिन चुनौतियां बनी रहेंगी. लेकिन ये तय है कि 2026 पीएम मोदी के लिए वैश्विक मान्यता का वर्ष हो सकता है, जहां ज्योतिषीय योग और दशाएं नोबेल शांति पुरस्कार की संभावना को प्रमाणिक रूप से मजबूत बनाती हैं. 

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.