Navgrah Shani Dev Katha: एक समय स्वर्गलोक के सत्ता सिंहासन पर आसीन इन्द्रदेव ने सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु से अनुरोध किया कि आप लोग क्रमशः अपने मुख से अपना-अपना शुभ, अशुभ, आकृति-प्रकृति, व्यक्तित्व, प्रभाव, शक्ति, पराक्रम और गरिमा का वर्णन करें. तब नवग्रहों में सबसे सूर्य, फिर चंद्रमा,फिर मंगल, फिर बुध, गुरु और फिर शुक्र ने अपने गुणों का गुणगान किया, जिसकी कथा हमने आपको बताई थी. यहां पढ़ें-Navgrah Katha 6: नवग्रहों में मैं शुक्र देव हूं... दांपत्य सुख, कला और ऐश्वर्य का दाता

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शनि ग्रह की कथा (Shani Grah ki Kahani)

शनि देव ने समस्त ग्रहों को संबोधित करते हुए कहा, ‘तुम सब कोरी बकवास कर रहे हो. तुममें सबसे बड़ा तो मैं ही हूं. मेरे पिताजी सूर्य देव भी मेरी ऊंचाई से घबराते हैं, क्योंकि मैं उनसे भी ऊंचा हूं. सूर्य देव सारे ग्रहों में प्रबल हैं, उन्हीं से सारे ग्रह प्रकाश पाते हैं, किंतु मैं उससे भी ज्यादा प्रबल एवं पराक्रमी हूं. सूर्य देव भी मेरा लोहा मानते हैं. मेरा रंग भले ही काला है पर शिव के महाकाल का स्वरूप भी काला है. इसलिए मैं शिव स्वरूप महाकाल का शिष्य हूं. हर पल सोच-विचार कर सतर्क कदमों से शनैः-शनैः चलने के कारण ही मुझे शनैश्चर कहते हैं. शरीर में लौह तत्व के रूप में विराजमान रहता हूं. प्राणियों को मैं सुख-दुख भोगने वाला बनाता रहता हूं. मैं रहस्य विद्या, गूढ़ तत्व ज्ञान, नौकर-चाकर, यश-अपयश तथा शारीरिक बल प्रदान करने वाला हूं. मैं ही व्यक्ति के लिए मृत्यु का कारण बनता हूं. मैं न्यायकारी हूं, अपराधी को दंड देने में समर्थ हूं.

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मैं अखंड ब्रह्मांड का सर्वोच्च न्यायाधीश हूं. मेरे प्रभुत्व में तिल, पेट्रोल, डीजल, जलाने का तेल, कोयला, मादक पदार्थ के व्यापार से लाभ होता है. मैं भले ही धीरे-धीरे चलता हूं, किंतु लाभ-हानि देने में बहुत ही तेज हूं. मेरे कारण व्यक्ति को अप्रत्याशित लाभ एवं अप्रत्याशित हानि दोनों ही हो जाती हैं.

मेरे वार यानी शनिवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति तीव्र स्वभाव का, दृढ़ प्रतिज्ञ, रंग-रूप में श्याम वर्ण लिए हुए, पुरुषत्व से पूर्ण, साहसी तथा मन में उत्साही होता है. ऐसा व्यक्ति लंबे तन का, अंडाकार मुखमंडल वाला, लंबे काले बालों से परिपूर्ण होता है और मेरे अशुभ होने पर 27वें-29वें वर्ष में कष्ट भोगता है तथा पूरे 88 वर्षों तक जीवित रहता है. यदि मैं उच्च आयु का दाता बनूं तो 120 वर्ष की आयु देता हूं.

मैं सारे जगत को प्रेरणा देता हूं कि वे कर्म करें और शतायु प्राप्त कर सुख भोगें. इसलिए मेरी तीसरी साढ़ेसाती का द्वितीय और तृतीय चरण व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है. कोई भी व्यक्ति अपने संपूर्ण जीवन में तीसरी साढ़ेसाती को भोगकर आगे की आयु प्राप्त नहीं कर सकता, चाहे वह देव हो या दानव.

मेरे वार शनिवार के दिन गृहप्रवेश, नौकर-चाकर रखना, लौह धातु, मशीनरी तथा कलपुर्जों के साथ तिल और तेल का व्यापार करना शुभ रहता है. बुरे कार्य करना, तेल लगाना, तेल घर पर लाना, लोहा लाना, बीज बोना तथा कोई भी कृषि कार्य कराना अशुभ माना जाता है. मेरी दो राशियां मकर और कुंभ हैं. उच्च राशि तुला है और नीच राशि मेष है. कलियुग में मेरा महत्व सबसे अधिक है, इसलिए मैं सारे ग्रहों में सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा हूं.

ये भी पढ़ें: Navgrah Katha 5: नवग्रहों में मैं देव गुरु बृहस्पति हूं... जानें कैसे बदलता हूं भाग्य और ज्ञानDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.