IIT Baba Abhay Singh: बीते वर्ष 2025 में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन हुआ था, जिसमें कई साधु-संत और संयासी चर्चा का विषय बने और कुछ तो काफी वायरल भी हुए, जिनमें अभय सिंह भी एक रहे. शांत चेहरा, घुंघराले बाल, रुद्राक्ष की माला पहने हुए आईआईटी वाले अभय सिंह का साधु जीवन महाकुंभ में चर्चा का विषय रहा.

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लंबे समय से अभय सिंह मीडिया से दूर थे. लेकिन अब एक बार फिर से वे सुर्खियों में छाए हुए हैं, लेकिन इस बार चर्चा का विषय उनका आध्यात्मिक प्रवचन या साधु जीवन नहीं, बल्कि उनकी शादी है. एरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद नौकरी-पेशा छोड़ा संन्यास और अध्यात्म की राह पर चलने वाले अभय सिंह अब गृहस्थ जीवन शुरू कर चुके हैं. अभय सिंह ने प्रतीका (Prateeka) के साथ विवाह किया है.

संयासी जीवन अपनाकर सालों तक माता-पिता और परिवार से दूर रहने वाले अभय सिंह सोमवार 6 अप्रैल 2026 को हरियाणा के झज्जर पिता के पास पहुंचे. लेकिन इस बार वो अकेले नहीं बल्कि पत्नी प्रतीका के साथ माता-पिता से मिलने आएं. 

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महाशिवरात्रि के दिन किया विवाह

अभय सिंह ने मीडिया को बताया कि, प्रतीका के साथ उन्होंने महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 15 फरवरी 2026 को हिमाचल के अघंजर महादेव मंदिर में शादी की. इसके बाद 19 फरवरी 2026 को कोर्ट मैरिज भी किया. 'मेरी पत्नी प्रतीका, मूल रूप से कर्नाटक की रहने वाली हैं और वह भी इंजीनियर हैं. शादी के बाद दोनों फिलहाल हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में रह रहे हैं.'

पत्नी प्रतीका ने कहा कि, ‘अभय बहुत सरल, ईमानदार और सच्चे इंसान है’. उन्होंने बताया कि, दोनों की मुलाकात एक साल पहले हुई थी. विवाह के बाद दोनों मिलकर सनातन और आध्यात्म को आगे बढ़ाने का काम करेंगे और भविष्य में सनातन यूनिवर्सिटी भी बनाने की योजना बनाएंगे.

महाशिवरात्रि पर विवाह का महत्व

हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का दिन बेहद पवित्र माना जाता है.धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इसलिए इस दिन विवाह को शुभ और मंगलकारी माना जाता है. ऐसे पावन दिन पर अभय सिंह और प्रतीका ने अघंजर महादेव मंदिर में पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के साथ विवाह किया.

संन्यास से गृहस्थ जीवन में अभय सिंह

धार्मिक दृष्टि से सनातन धर्म में जीवन को चार आश्रमों ब्रह्मचर्य (शिक्षा), गृहस्थ (पारिवारिक जीवन), वानप्रस्थ (त्याग की शुरुआत) और संन्यास (मोक्ष) में बांटा गया है. इनमें गृहस्थ आश्रम को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यही आश्रम समाज और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने का आधार बनता है.

महाकुंभ से मिली पहचान

बता दे कि, IITian बाबा अभय सिंह उस समय खासा चर्चा में आए थे जब वे, Mahakumbh के दौरान साधु वेश में दिखे. उनकी पहचान इसलिए खास बनी, क्योंकि वे एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान Indian Institute of Technology Bombay से पढ़े हुए हैं. उच्च तकनीकी शिक्षा हासिल करने के बाद उनका आध्यात्म की ओर झुकाव लोगों के लिए काफी दिलचस्प विषय बना. महाकुंभ में उनकी सादगी और विचारों के कारण वे सोशल मीडिया पर “IITian बाबा” के नाम से काफी वायरल हुए थे.

ये भी पढ़ें: Mahakumbh 2025 IIT Baba: महाकुंभ के IITian बाबा अभय सिंह की मोह माया वाली जिंदगी से वैराग्य तक की कहानीDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.