Madhya Pradesh Bhojshala: धार की ऐतिहासिक भोजशाला में मंगलवार का दिन खास रहा. इंदौर हाईकोर्ट के आदेश और एएसआई के नए निर्देशों के बाद मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे. सुबह से पूजा-अर्चना, सरस्वती वंदना, हनुमान चालीसा पाठ और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए.

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परिसर के बाहर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला. इंदौर हाईकोर्ट के आदेश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई द्वारा नई व्यवस्था लागू की गई है. इसके तहत भोजशाला  अब सूर्योदय से सूर्यास्त तक श्रद्धालुओं के लिए खुली रहेगी.

मंगलवार होने के कारण सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई. भोज उत्सव समिति द्वारा मंगलवार सत्याग्रह कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सरस्वती वंदना, हनुमान चालीसा पाठ और अन्य धार्मिक कार्यक्रम हुए. बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल हुए.

भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने बताया कि वर्ष 2003 के आंदोलन और संघर्ष में योगदान देने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. 2003 के बाद पहली बार बदले नियमों के बीच पूजा हो रही है. यहां सूर्योदय से सूर्यास्त तक विशेष हवन-पूजन होगा. कार्यक्रम के बाद परिसर के बाहर आतिशबाजी और जयकारों के साथ लोगों ने खुशी जाहिर की. श्रद्धालुओं ने इसे लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष और आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन बताया.

 पहली बार भोजशाला के आंदोलन में शामिल तीन शहीदों की तस्वीर भी गर्भगृह में रखी गई. हाई कोर्ट ने शनिवार को आदेश देते हुए कहा था कि भोजशाला मां सरस्वती का मंदिर है. इस आदेश के बाद हिंदुओं को हर मंगलवार की जगह 365 दिन पूजा की अनुमति मिली थी.

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