Islam religion: इस्लाम में संगीत सुनना कुछ विद्वानों के अनुसार हराम (निषिद्ध) और पाप माना जाता है. खासकर जब यह गलत बातों या व्यभिचार को बढ़ावा देता हो या समय की बर्बादी करता हो.
हालांकि कुछ विद्वानों के अनुसार संगीत सुनना हलाल है, बशर्ते कि इसमें अनैतिक बातें, नशा या गैर इस्लामी विचार शामिल न हों. कुछ हदीसों के आधार पर, यह भी कहा गया है कि संगीत अपने आप में हराम नहीं है. इसलिए, इसे संगीत के प्रकार और उसके बोल की सामग्री पर निर्भर करता है कि वह हलाल है या हराम.
इस्लाम में संगीत सुनना पाप है?इस्लाम में संगीत का विषय विवादास्पद है और इस पर अलग-अलग राय है, लेकिन कई इस्लामी विद्वान मानते हैं कि संगीत सुनना और बजाना इस्लाम में हराम या पाप है. कुरान में सीधे तौर पर संगीत को मना नहीं किया गया है.
लेकिन कुछ हदीसों और विद्वान इस बात को बताते हैं कि संगीत खासतौर पर वह जो गलत या पतनशील बातों को बढ़ावा देता है, उससे बचना चाहिए.
संगीत को पाप माने जाने के कारण
पाप को बढ़ावा देनाकुरान की आयतों और हदीसों के अनुसार, संगीत और म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल हानिकारक और पापपूर्ण कामों को बढ़ावा देता है, इसलिए यह हराम है.
दिलों को बीमार करनाकुछ विद्वानों का तर्क है कि संगीत दिल को कमजोर और बीमार बनाता है, जो आध्यात्मिक विकास के लिए हानिकारक हो सकता है.
अश्लीलता और व्यभिचार से जुड़ावकुछ आयतें संगीत को अश्लीलता, व्यभिचार और गलत कामों से जोड़कर दिखाया गया है, खासकर उन जगहों पर जहां गैर महरम पुरुष के साथ नाचना गाना होता है.
परम पापकुछ विद्वान संगीत को बहुत बड़े पापों की श्रेणी में रखते हैं, जिससे संगीत सुनने और गाने वाले दोनों को नरक की सजा का दावा किया गया है.
गलत कार्यों को बढ़ावाऐसे गति जो शराब पीने या अनैतिकता को बढ़ावा देते हैं, हराम माने जाते हैं.
कुरान और सुन्नत से निषेधकुछ विद्वान कुरान की आयतों और हदीसों के आधार पर संगीत को हराम मानते हैं.
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