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केदारनाथ की चमत्कारिक अखंड ज्योति का रहस्य: Kedarnath Live केदारनाथ मंदिर में अखंड ज्योति जलती रहती है. जब केदारनाथ जी के कपाट बंद हो जाते हैं तब भी पूरे छः माह दीपक जलता रहता है. जबकि इस दौरान केदारनाथ धाम में किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है. छ: माह जब मदिर खोला जाता है तो अखंड दीपक जलता रहता है और मंदिर भी साफ-सुथरा रहता है. यह रहस्य चमत्कार ही है.
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भक्तों के लिए कब तक खुला रहेगा केदारनाथ मंदिर का कपाट आज 2 मई 2025 से केदारनाथ मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं. इसके बाद अगले 6 महीने तक मंदिर के कपाट खुले रहेंगे और भक्त दर्शन कर पाएंगे. 6 महीने के बाद फिर से मंदिर का कपाट बंद कर दिया जाएगा.
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केदारनाथ के बिना अधूरा है बद्रीनाथ धाम का दर्शन 'अकृत्वा दर्शनम् वैश्वय केदारस्याघनाशिन:, यो गच्छेद् बदरी तस्य यात्रा निष्फलताम् व्रजेत्'
यानि केदारनाथ के दर्शन किए बिना अगर बद्रीनाथ धाम के दर्शन किए जाए तो उसकी चारधाम यात्रा निष्फल या व्यर्थ है.
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केदारनाथ यात्रा लाभ: Kedarnath Dham Yatra केदारेशस्य भक्ता ये मार्गस्थास्तस्य वै मृता:।
तेऽपि मुक्ता भवन्त्येव नात्र कार्य्या विचारणा।।
तत्वा तत्र प्रतियुक्त: केदारेशं प्रपूज्य च।
तत्रत्यमुदकं पीत्वा पुनर्जन्म न विन्दति।।
शिव पुराण के अनुसार, केदारनाथ में दिव्य ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से सारे पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है.
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केदारनाथ का महत्व: Significance of Kedarnath केदारनाथ भगवान शिव की भूमि है, यहां भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में उपस्थित है. स्कंद पुराण के मुताबिक शिव स्वयं मां पार्वती को इस भूमि को अति प्राचीन और अपना आवास बताते हैं. इसलिए धार्मिक दृष्टिकोण से इस स्थान का महत्व और बढ़ जाता है.
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जय बाबा केदारनाथ: Kedarnath Dham शिवलोक कहे जाने वाले केदारनाथ धाम से बड़ा कोई उचित स्थान नहीं. माना गया है कि यहां भगवान शिव वहां स्वयं विराजते हैं.
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वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ खुले केदारनाथ धाम के कपाट: Kedarnath Dham Live आज 2 मई 2025 सुबह 7 बजे वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ बाबा केदारनाथ के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिए गए हैं.अब ग्रीष्मकाल के छह महीने तक यहीं बाबा केदार की नित्य पूजा अर्चना संपन्न होगी.
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केदारनाथ में बैल आकृति पिंड के रूप में क्यों विराजते हैं शिव ? पुराणों के अनुसार केदार महिष अर्थात भैंसे का पिछला भाग है. यहां भगवान शिव भूमि में समा गए थे. जब पांडव ब्रह्म हत्या के बाद उसका पश्चाताप करने भगवान शिव के पास आए तो वह अंतर्ध्यान हो गए. पांडवों ने हार नहीं मानी और शिव की खोज में केदार पहुंच गए. भगवान शंकर ने तब तक बैल का रूप धारण कर लिया और वे अन्य पशुओं में जा मिले. भीम ने उन्हें पहचान लिया और बैल को पकड़ा लेकिन बैल भूमि में अंतर्ध्यान होने लगा. तब भीम ने बैल की त्रिकोणात्मक पीठ का भाग पकड़ लिया. तभी से यहां बैल आकृति पिंड में शिव जी विराजमान हैं.
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Kedarnath Temple: कपाट बंद होने के बाद 6 महीने तक जलता है दीपक केदारनाथ मंदिर के द्वार जब बंद होते है, तो वहां एक दीपक जला देते हैं. 6 माह बाद जब मई में पुजारी वापस केदारनाथ लौटते हैं तो वह दीपक उनको जलता हुआ मिलता है. आश्चर्य की बात तो यह है कि मंदिर को जब खोला जाता है तो उसमें वैसी ही साफ सफाई रहती है, जब उसे बंद करने के समय की गई रहती है.
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Kedarnath Mandir: किसने कराया था मंदिर का निर्माण ? धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मंदिर का निर्माण पांडव राजा जन्मेजय कराया था. बाद में क्षतिग्रस्त होने के पश्चात 8 वीं सदी में आदिगुरु भगवान शंकराचार्य ने इसका पुनर्निर्माण कराया गया.
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Kedarnath Dham: कपाट खुलने से पहले पंचमुखी डोली का महत्व आज शाम बाबा केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली भी केदारनाथ मंदिर पहुंच जाएगी. मंदिर के कपाट बंद करने के बाद बाबा केदार की भोग मूर्ति को पंचमुखी डोली में ओंकारेश्वर मंदिर लाया जाता है. यहां वह 6 महीने तक विराजते हैं. पंचमुखी डोली में केदारनाथ के चांदी से बनी मूर्ति के पांच मुख दर्शाए गए हैं. कपाट खुलने से पहले इसकी विशेष पूजा होती है उसके बाद ही भक्तों को बाबा दर्शन देते हैं.
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Kedarnath Kapat opening: रंग-बिरंगे फूलों से सजा मंदिर इस साल केदारनाथ मंदिर को भव्य सजाया गया है. ऋषिकेश, गुजरात से आई पुष्प समिति ने मंदिर को 108 क्विंटल फूलों से भव्य रूप में सजाया गया है. मंदिर की इस आकर्षक सजावट को देखने के लिए भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं.
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Kedarnath yatra 2025: बाबा केदारनाथ के कपाट किस समय खुलेंगे ? बाबा केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई 2025 को सुबह 7 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे. 28 अप्रैल को ओंकारेश्वर मंदिर से बाबा की पंचमुखी डोली यात्रा का शुभारंभ हुआ था.