Sharad Purnima in Jaipur:गुलाबी नगरी जयपुर में शरद पूर्णिमा का पावन पर्व बड़े ही हर्षोल्लास, भक्ति और आस्था के साथ मनाया गया. शहर के प्रमुख और ऐतिहासिक मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. इस खास अवसर पर मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए, जहां भक्तों ने अपने आराध्य देवों के दर्शन कर सुख-समृद्धि, शांति और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की.

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आराध्य देवों का मनोहारी श्रृंगार और अभिषेक

शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर मंदिरों में भगवान का अलौकिक व मनोहारी श्रृंगार किया गया. हाथोजधाम स्थित प्रसिद्ध श्री दक्षिणमुखी बालाजी मंदिर में विशेष आयोजन देखने को मिला. यहां भगवान श्री सीताराम जी, श्री राधागोविन्द देव जी और श्री दक्षिणमुखी बालाजी महाराज को श्वेत यानी धवल पोशाक धारण कराई गई.

पूजा के क्रम में सबसे पहले विधि-विधान से पंचामृत अभिषेक किया गया. इसके बाद प्रभु को विशेष भोग अर्पित हुआ. मंदिर परिसर में आयोजित भजन संध्या में भक्तों ने भक्ति रस का आनंद लिया और पूरा वातावरण भक्तिमय भजनों से गूंज उठा.

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चंद्रमा की चांदनी में रखी गई औषधीय खीर

मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है. इसी परंपरा को निभाते हुए मंदिरों में रात को विशेष औषधीय खीर तैयार की गई. इस खीर को खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की शीतल चांदनी में रखा गया, ताकि चंद्रमा के औषधीय गुण इसमें समाहित हो सकें.

देर रात भगवान को इस अमृतमयी खीर का भोग लगाया गया. इसके बाद बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच खीर की प्रसादी बांटी गई.

पूरे शहर के मंदिरों में रही उत्सव जैसी रौनक

हाथोजधाम के अलावा जयपुर के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी विशेष झांकियां सजाई गईं. दिनभर चले भजन-कीर्तन और आरती के बाद भक्तों ने परिवार के मंगलमय जीवन की कामना करते हुए प्रसाद ग्रहण किया. शहरभर में शरद पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ.

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