Different traditions of Ramadan: इस्लाम धर्म में रमजान का महीना बेहद पाक माना जाता है. दुनियाभर के मुस्लिम देशों में इसे मनाया जाता है. हालांकि इस मकसद एक ही होता है खुदा की इबादत करना, रोजा रखना और आत्म संयम लेकिन हर देश में इसे मनाने का तरीका थोड़ा अलग होता है. 

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दुनियाभर में दो अरब से ज्यादा मुसलमान रहते हैं और वे अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं. ऐसे में हर हिस्से में रमजान स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के मुताबिक ढल जाता है. आइए जानते हैं कुछ मुस्लिम देशों की खास रमजान परंपराओं के बारे में.

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UAE ‘हक अल लैला’ की परंपरा

संयुक्त अरब अमीरात में रमजान से पहले 'हक अल लैला' नाम का विशेष आयोजन होता है. यह शाबान महीने के बीच में मनाया जाता है. इस दिन बच्चे पारंपरिक कपड़े पहनकर मोहल्ले में घर-घर जाते हैं, गीत गाने के साथ मिठाइयां इक्ट्ठा करते हैं. 

इसके अलावा एक लोकप्रिय गीत गाते हैं, 'अतुना अल्लाह यतिकुम, बैत मक्का यिदिकुम' जिसका मतलब होता है कि, देने वाले को अल्लाह इनाम देने के साथ मक्का की यात्रा करने का मौका देगा. यह परंपरा बच्चों में खुशी और सामाजिक जुड़ाव की भावना को बढ़ावा देती है. 

मिस्र में फानूस और मेसहारती की परंपरा

मिस्त्र में रमजान का महीना बेहद खास होता है. बाजार, सड़कें और घर रंग-बिरंगी रोशनी से सजाने के साथ फानूस यानी पारंपरिक लालटेन रमजान की पहचान होती है. 

माना जाता है कि, फातिमिद काल में एक शासक के स्वागत में काहिरा की सड़कों पर लालटेन जलाई गई थीं. तब से यह परंपरा रमजान से जुड़ गई. 

मिस्त्र में 'मेसहारती' भी एक विशेष परंपरा है. यह व्यक्ति रात में लोगों को सुहूर के लिए जगाने का काम करता है. वह गलियों में घूमकर लोगों को नाम लेकर आवाज देता है, ताकि वे रोजा शुरू करने से पहले खाना खा सकें. 

मोरक्को में खास व्यंजन और पारंपरिक पहनावा

मोरक्को में रमजान स्थानीय स्वाद और परंपराओं से जुड़ा होता है. इफ्तार में हरिरा सूप, तंजिया और रफिसा जैसे विशेष व्यंजन बनाए जाते हैं. 

यहां लोग पारंपरिक कपड़े पहनने के साथ पुरुष जुब्बा या गंडौरा पहनते हैं. जबकि महिलाएं कफ्तान धारण करती हैं. मोरक्को में रमजान के दौरान धार्मिक माहौल के साथ सांस्कृतिक रंग भी साफ नजर आता है. 

इंडोनेशिया में रमजान शुद्धिकरण और पूर्वजों की याद का मौका

इंडोनेशिया में रमजान से पहले पदुसान नाम की परंपरा अदा की जाती है. लोग नेचुरल लेक या पवित्र जल में स्नान करते हैं. वहां के मुस्लिम लोगों का मानना है कि, इससे शरीर और मन शुद्ध होता है और पवित्र महीने की अच्छी शुरुआत होती है.

एक अन्य परंपरा न्याद्रान है. परिवार के लोग अपने दिवंगत रिश्तेदारों की कब्रों पर जाकर दुआ करते हैं. वे खाना और कुछ फल लेकर जाते हैं, जिन्हें बाद में आपस में बांटा जाता है. यह भाईचारे और सम्मान का प्रतीक भी है.

लेबनान में इफ्तार की तोप

लेबनान में मिदफा अल इफ्तार यानी इफ्तार तोप की परंपरा काफी चर्चित है. रोजा खत्म होने के बाद तोप दागकर लोगों को इफ्तार का संकेत दिया जाता है. यह परंपरा मध्य पूर्व के कई देशों में देखने को मिल जाती है, लेकिन लेबनान में इसे विशेष पहचान मिली है. 

रमजान का मकसद पूरे विश्व में एक जैसा है, लेकिन हर देश ने इसे अपनी संस्कृति के मुताबिक अपनाया है. कहीं लालटेन रोशनी बिखरेती है, तो कहीं तोप की आवाज से इफ्तार का ऐलान होता है. यही विविधता रमजान को वैश्विक स्तर पर खास पहचान दिलाती है. 

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