Surya Grahan 2020: हिन्दू धर्म शास्त्रों, पुराणों और अन्य धर्म ग्रंथों में सूर्य ग्रहण को अशुभ माना गया है. सूर्य ग्रहण से पड़ने वाले कुप्रभावों से बचने के लिए लोगों में कुछ तथ्य ऐसे भी फैले हैं जिनके पीछे का विज्ञान और है. आइये जानें इन तथ्यों के पीछे के विज्ञान की हकीकत क्या है? घरोंसेबाहरनिकलें प्राचीन काल में ऋषि मुनियों के द्वारा यह धारणा फैलाई गई कि सूर्य ग्रहण के समय लोगों को विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को घरों से बाहर नहीं निकलना चाहिए. सूर्य ग्रहण के दौरान घर से बाहर निकलने पर अनर्थ हो जायेगा. इसके पीछे उनकी सोच यह रही होगी कि अंधकार में निकलना सभी के लिए जंगली जानवरों या अन्य नुकसानदायक चीजों से खतरा हो सकता है. इस विषय पर आधुनिक विद्वानों का भी यही मानना है कि पहले समय में सूर्य को ही प्रकाश का एक मात्र स्रोत माना जाता था. सूर्य ग्रहण के समय अंधकार हो जाता था. अंधेरे में घर से बाहर निकलना उचित नहीं होता है. परन्तु आज के समय में प्रकाश के अनेक स्रोत हैं. ऐसे में जो लोग आज भी यह मानते हैं कि सूर्य ग्रहण के समय घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए नहीं तो अनर्थ हो जायेगा. उनका यह मानना आज के इस वैज्ञानिक युग में प्रासंगिक नहीं है. गर्भवतीमहिलापरग्रहणकीसायानहींपड़नाचाहिए  इस पर लोगों की अलग –अलग मान्यताएं हैं. कोई कहता कि प्रेगनेंट महिला पर ग्रहण की साया पड़ने से बच्चे अपंग पैदा होते हैं. कुछ लोगों का मानना है कि प्रेगनेंट महिला को अपने शारीर पर गेरू लगा लेना चाहिए. इस विषय पर आधुनिक विद्वानों का कहना है कि ग्रहण के वक्त जो किरणें पृथ्वी पर पड़ती हैं उसके कुछ साइडइफेक्ट होते हैं. इन किरणों से सावधान रहना चाहिए. उन्हें अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार काम करना चाहिए. ग्रहणमेंबनाखानाजहरहोजाताहै. पहले सूर्य ही प्रकाश के स्रोत थे. इसलिए खाना बनाने और खाने के समय सूर्य के प्रकाश की नितांत आवश्यकता होती है. ग्रहण के समय अंधकार हो जाता था. इसलिए अन्धकार में भोजन बनाना और भोजन करना दोनों उचित नहीं था, क्योंकि अन्धकार में खाना बनाते समय या भोजन करते समय कुछ भी अनुचित चीज भोजन में पड़ सकती है जो नुकसानदायक हो. नुकसानदायक चीज का भोजन के साथ पेट में चले जाने से जान को खतरा हो सकता है. इसलिए प्राचीन काल में ऐसी मान्यता थी. परन्तु आज के समय में प्रकाश के अनेक स्रोत हैं. इसलिए सूर्य ग्रहण के समय भी लोगों के यहाँ प्रकाश की व्यवस्था होती है. आज की परिस्थितियों में ग्रहण के समय खाना न बनाने और न खाने की बात प्रासंगिक नहीं है. ग्रहणकेसमयभगवानकाध्यानकरनाचाहिए. प्राचीन काल में सूर्य ग्रहण के समय अंधकार हो जाता था. अंधकार में कोई काम करना संभव नहीं था. इसलिए वे खाली समय में क्या करें? इसी खाली समय के सदुपयोग के लिए कहा जाता रहा कि वे भगवान का ध्यान करें. परन्तु आज ऐसी स्थिति नहीं है. ग्रहण के समय में भी लोगों के पास प्रकाश की उचित व्यवस्था है. इसलिए सूर्य के प्रकाश के अभाव में भी काम किया जा सकता है.

सूर्यग्रहणकासमय

सूर्यग्रहण इस साल 21 जून को लगाने वाला है. इस दिन रविवार है और आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तथा मृगसिरा और आद्रा नक्षत्र. यह सूर्य ग्रहण मिथुन राशि में लगेगा.  सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण रविवार की सुबह 9:15 बजे से शुरू हो जाएगा और 03:04 बजे समाप्त होगा जबकि सूतक काल 20 जून शनिवार की रात 09:25 से शुरू हो जाएगा और ग्रहण की समाप्ति के साथ ही समाप्त होगा.