Safalta Ki Kunji: चाणक्य की चाणक्य नीति कहती है कि जिसे लक्ष्मी जी का आर्शीवाद प्राप्त है उसका जीवन से परेशानियां कोसों दूर रहती हैं. लेकिन लक्ष्मी जी का आर्शीवाद प्राप्त करना इतना आसान नहीं है. लक्ष्मी जी उसी व्यक्ति को अपना आर्शीवाद प्रदान करती हैं जिसमें कुछ विशेषताएं हों. ये विशेषताएं कोई भी व्यक्ति अपने भीतर विकसित कर सकता है. जो इन विशेषताओं को अपने भीतर विकसित कर लेता है उसका जीवन लक्ष्मी जी सुख सुविधाओं से पूर्ण बना देती हैं.


पौराणिक कथाओं के अनुसार लक्ष्मी जी उसी व्यक्ति को अपना आर्शीवाद प्रदान करती है, जों अनुशासन, कठोर परिश्रम और परोपकार की भावना रखता है. वहीं ऐसे लोगों को लक्ष्मी जी बिल्कूल भी पसंद नहीं करती हैं.


स्वच्छता के नियमों को न मानने वालों से दूर रहती हैं लक्ष्मी जी
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार लक्ष्मी जी उस स्थान और व्यक्ति के पास जाना पसंद नहीं करती हैं जो साफ सफाई पर ध्यान नहीं देता है. गंदी भाषा, गंदा स्थान, गंदे विचार आदि से लक्ष्मी जी बहुत दूर रहती है. इसीलिए व्यक्ति को सदैव स्वच्छ रहना चाहिए, साफ वस्त्र धारण करने चाहिए, अच्छे विचार और अच्छा आचरण रखना चाहिए.


गलत संगत से दूर रहें
लक्ष्मी जी उन लोगों को अपना आर्शीवाद नहीं देती हैं जिनकी संगत गलत होती हैं. धर्म ग्रंथ और महापुरूषों की वाणी भी यही कहती है कि व्यक्ति को सदैव अच्छी संगत में बैठना चाहिए अच्छी संगत से अच्छे विचार मन में आते हैं. जो लोग गलत संगत में बैठते हैं वे एक दिन हानि उठाते हैं, ऐसे लोगों को सम्मान भी प्राप्त नहीं होता है.


दूसरों के प्रति प्रेम का भाव रखो
लक्ष्मी जी उस व्यक्ति को अपना आर्शीवाद जरूर देती है जो मानव कल्याण के बारे में सोचते हैं और प्रयास करते हैं. दूसरों के प्रति प्रेम भाव रखने वालों को कभी कष्ट नहीं देती हैं. ऐसे लोगों को समाज में बहुत सम्मान प्राप्त होता है. गीता का उपदेश भी प्रेम के महत्त्व को बताता है. प्रेम सभी प्रकार के सुखों का कारक है.


कमजोर को कभी न सताएं
कमजोर व्यक्ति को जो व्यक्ति परेशान करता है और सताता था उसे लक्ष्मी जी बहुत जल्दी त्याग देती हैं. ऐसे लोगो कठोर दंड पाते हैं.


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