Aaj ka Panchang 8 October Navratri Puja: मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से मिलता है ये फल, जानें
Aaj ka Panchang 8 October Navratri Maa Brahamcharini Puja updates: आज शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. इन नियमों के बिना पूजा रहती है अधूरी.
एबीपी न्यूजLast Updated: 08 Oct 2021 03:18 PM

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Aaj ka Panchang 8 October Navratri Maa Brahamcharini Puja updates: हिंदी पंचांग के अनुसार, आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है. द्वितीया तिथि सुबह 10 बजकर 48...More
Aaj ka Panchang 8 October Navratri Maa Brahamcharini Puja updates: हिंदी पंचांग के अनुसार, आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है. द्वितीया तिथि सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगी. उसके बाद तृतीया तिथि प्रारंभ होगी. आज 8 अक्टूबर दिन शुक्रवार है. शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन भी है. नवरात्रि में माता रानी के 9 रूपों की पूजा की जाती है. आज नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है.Navratri 2021: नवरात्रि में इन राशियों पर बरसेगी मां की विशेष कृपा, अचानक होगा धन लाभ, जानेंब्रह्म शब्द का आशय तपस्या से है और ब्रह्मचारिणी शब्द का अर्थ {Brahamcharini Means} तप का आचरण करने वाली से है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन में मां ब्रह्माचारिणी का पूजन करने से भक्तों को उसके सभी कार्यों में मन वांछित सफलता प्राप्त होती है. यदि आप भी किसी कार्य में जीत हासिल करना चाहते हैं तो देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा अवश्य करें.Navratri 2021: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आरती करते समय धारण करें इस रंग के वस्त्र, जानें मां की आरतीआज का पंचांगमास, पक्ष, तिथि व दिन: आश्विन मास, शुक्ल पक्ष, द्वितीय तिथि, शुक्रवारआज का दिशाशूल: पश्चिम दिशा मेंआज का राहुकाल: आज 8 अक्टूबर को सुबह10:41:30 बजे से दोपहर 12:08 बजे तकआज का पर्व एवं त्योहार: शारदीय नवरात्रि के दूसरा दिन, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा व व्रतNavratri Second Day Puja: नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, इस विधि से पूजा करने से प्रसन्न होंगी मां
मां ब्रह्माचिरणी की पूजा से मिलता है ये लाभ
मां का ब्रह्मचारिणी रूप बेहद शांत, सौम्य और मोहक है. कहा जाता है कि मां के इस स्वरूप की विधि-विधान पूर्वक पूजा करने से भक्तों को तप, त्याग, वैराग्य और सदाचार जैसे गुणों की प्राप्ति होती है. उन्हें साधक होने का फल मिलता है. भक्त को हर कार्य में सफलता मिलती है.