Relationship Possessiveness: रिश्ते में आने के बाद अक्सर देखा जाता है कि पार्टनर एक-दूसरे के लिए पहले से ज्यादा पजेसिव यानी फील करने लगते हैं. यह भावना सिर्फ लड़कियों तक सीमित नहीं होती, लड़के भी अपने पार्टनर को लेकर ऐसा ही महसूस करते हैं, लेकिन अक्सर लड़कियों में यह भावना जल्दी और खुलकर दिखाई देती है.

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इसके पीछे कोई कमजोरी नहीं बल्कि दिमाग में होने वाले हार्मोनल बदलाव और भावनात्मक जुड़ाव की वजह होती है. जब कोई किसी रिश्ते में गहराई से जुड़ता है, तो उसका दिमाग उस इंसान को अपनी जिंदगी का जरूरी हिस्सा मान लेता है, आइए जानते हैं इसके पीछे का साइंस.

ऑक्सीटोसिन हार्मोन बनाता है गहरा लगाव

रिश्ते में पजेसिव होने के पीछे सबसे बड़ी वजह ऑक्सीटोसिन नाम का हार्मोन है, जिसे 'लव हार्मोन' भी कहा जाता है. यह हार्मोन खासतौर पर रिश्तों में विश्वास और लगाव को बढ़ाता है. इसी वजह से गले लगने या हाथ पकड़ने जैसी छोटी-छोटी बातें भी बहुत खास महसूस होती हैं. जब यह हार्मोन शरीर में ज्यादा बनने लगता है, तो पार्टनर के प्रति लगाव और गहरा हो जाता है और दिमाग उस रिश्ते को सुरक्षित रखने की कोशिश में ज्यादा सतर्क हो जाता है. इसी सतर्कता की वजह से इंसान को पार्टनर की छोटी-छोटी बातों पर भी ध्यान जाने लगता है और वह उसे खोने से डरने लगता है. यही डर आगे चलकर पजेसिवनेस का रूप ले लेता है. 

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इमोशनल इन्वेस्टमेंट और पुराना अनुभव भी है वजह

पजेसिव होने की दूसरी बड़ी वजह रिश्ते में की गई भावनात्मक इन्वेस्टमेंट होती है. जब कोई व्यक्ति किसी रिश्ते में अपना समय, भरोसा और भावनाएं लगाता है तो स्वाभाविक रूप से वह उस रिश्ते को लेकर ज्यादा सुरक्षात्मक हो जाता है. इसके अलावा अगर किसी के पुराने रिश्ते में धोखा या दिल टूटने जैसा अनुभव रहा हो, तो नए रिश्ते में भी वह असुरक्षा की भावना लेकर आता है, जिससे पजेसिवनेस और बढ़ जाती है. सामाजिक परवरिश और अपने आसपास देखी गई बातें भी इस भावना को प्रभावित करती हैं. हालांकि हल्की-फुल्की पजेसिवनेस रिश्ते में प्यार और परवाह को दिखाती है, लेकिन जब यह भावना जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए और शक का रूप लेने लगे, तो यह रिश्ते के लिए नुकसानदायक भी बन सकती है. 

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