Happy Marriage Secrets: अक्सर हमें अपने आसपास के लोगों या फिर घर में सुनने को मिलता है कि "शादियां स्वर्ग में बनती हैं" सुनने में यह बात अच्छी लगती है. लेकिन सद्गुरु इस सोच को पूरी तरह गलत मानते हैं. उनका कहना है कि यही रोमांटिक मिथक कई शादियों के टूटने की बड़ी वजह बनता है. अपनी सधी हुई लेकिन बिल्कुल जमीन से जुड़ी बातों में सद्गुरु बताते हैं कि आखिर क्यों समय की कसौटी पर कई रिश्ते टिक नहीं पाते. वजह सीधी है आप अपने पार्टनर से उम्मीद करने लगते हैं कि वही आपकी खुशियों का जरिया बने.
क्या कहा सदगुरु ने?
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक छोटे वीडियो में सद्गुरु शादी से जुड़ी सबसे बड़ी गलती पर बात करते हैं. वे कहते हैं कि "मानवता की सबसे बड़ी गलती यह रही कि उसने कहना शुरू कर दिया कि शादियां स्वर्ग में बनती हैं. इसी वजह से हालात इतने बिगड़े हुए हैं." उनके मुताबिक, शादी कोई किस्मत का तोहफा नहीं, बल्कि दो इंसानों की जिम्मेदारी है, जो अपनी-अपनी जरूरतों के साथ एक-दूसरे के साथ चलने की कोशिश करते हैं.
अक्सर लोग शादी में सपनों की दुनिया लेकर प्रवेश करते हैं, परियों जैसी कहानी, आंखों में सितारे. लेकिन फिर हकीकत सामने आती है. बिल, बच्चे, ससुराल, मतभेद और तकरार. धीरे-धीरे वही साथी, जिससे खुशी की उम्मीद थी, असंतोष की वजह बन जाता है. यहीं पर लोग चूक कर बैठते हैं. सद्गुरु कहते हैं कि जब आप अपने जीवनसाथी को अपनी खुशी का जिम्मेदार मान लेते हैं, तो रिश्ता बोझ बन जाता है.
किन बातों का ध्यान रखना जरूरी?
सद्गुरु यह भी समझाते हैं कि इंसान स्वभाव से जरूरतों से भरा हुआ होता है. शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक हर तरह की जरूरतें होती हैं. इन्हें पूरा करने के लिए हम अक्सर एक ही इंसान पर निर्भर हो जाते हैं. लेकिन एक व्यक्ति से हर जरूरत पूरी होने की उम्मीद रखना नाराजगी और टूटन की शुरुआत है. उनके मुताबिक, इस जाल से निकलने का रास्ता है आभार. अगर आप यह समझें और इसके लिए आभारी रहें कि कोई आपके साथ रहकर आपकी इतनी जरूरतें पूरी कर रहा है, तो रिश्ता संभल जाता है. दिक्कत तब शुरू होती है, जब आप यह मानने लगते हैं कि दूसरा आपको ज्यादा चाहता है या आपको ज्यादा जरूरत है, और आदर खत्म हो जाती है.
क्या नहीं है शादी का मूल नियम?
सद्गुरु कहते हैं कि शादी का मूल नियम यह नहीं है कि आप किसी से खुशी निचोड़ें या वह आपसे. अगर दो खुश लोग मिलते हैं, तो उनके बीच कुछ सुंदर घट सकता है. लेकिन अगर आप खुद दुखी हैं और चाहते हैं कि दूसरा आपको खुश करे, तो वह दुख कई गुना बढ़ जाता है. सच तो यह है कि एक छोटा सा "धन्यवाद" या थोड़ी सी समझदारी भी रिश्ते में चमत्कार कर सकती है.
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