किसी को पसंद करना जितना अच्छा एहसास है, उसे बताना उतना ही मुश्किल. मन में बार-बार यही आता है कि वह क्या सोचेगी, कहीं दोस्ती न टूट जाए या जवाब ना में न मिल जाए. ऐसे में जल्दबाजी न करें. पहले अपनी भावनाओं को समझें और फिर सही ढंग से बात आगे बढ़ाएं. दिल की बात कहने का कोई जादुई तरीका नहीं है, लेकिन आपका व्यवहार और बात करने का अंदाज अच्छा असर जरूर छोड़ सकता है.

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पहले दोस्ती और भरोसा बनाएं

अगर क्रश से बात करने में झिझक होती है, तो सीधे इजहार न करें. आम बातचीत से शुरुआत करें. उसकी पसंद, शौक और रोज की छोटी-छोटी बातों के बारे में पूछें. बात करते समय सिर्फ अपनी बातें न सुनाएं, उसकी बात भी ध्यान से सुनें. अगर आप पहले से दोस्त हैं तो दोस्ती को थोड़ा समय दें और एक-दूसरे को अच्छे से समझें. यह भी याद रखें कि दोस्ती होने का मतलब यह नहीं कि वह आपको उसी नजर से देखेगी. इसलिए उसकी सहजता और भावनाओं का सम्मान जरूर करें.

बात कहने के लिए सही समय चुनें

प्रपोज करने के लिए किसी खास दिन या महंगे तोहफे की जरूरत नहीं होती. ऐसा वक्त चुनें जब आप दोनों आराम से बात कर सकें और वह किसी जरूरी काम में न लगी हो. आप आमने-सामने बोल सकते हैं या चाहें तो एक सीधा और सच्चा मैसेज भी भेज सकते हैं. जैसे आप कह सकते हैं, "मुझे तुम्हारे साथ समय बिताना अच्छा लगता है और तुम मुझे दोस्त से थोड़ा ज्यादा पसंद आने लगी हो. अगर तुम्हें भी ऐसा लगता है, तो मैं तुम्हें और अच्छे से जानना चाहूंगा. इस तरह कहने से उस पर तुरंत जवाब देने का दबाव नहीं पड़ता.

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जवाब जो भी हो, सम्मान करें

अपनी बात कहने के बाद उसके जवाब को शांति से समझें. अगर वह भी आपको पसंद करती है तो रिश्ते को धीरे-धीरे आगे बढ़ाएं और एक-दूसरे को जानने का वक्त दें. अगर जवाब ना में मिले, तो बार-बार पूछने, मनाने या इमोशनल दबाव बनाने से बचें. किसी की पसंद और फैसले की इज्जत करना भी अच्छे रिश्ते की नींव है. सोशल मीडिया पर लगातार मैसेज करना या बिना पूछे अकेले मिलने की कोशिश करना भी ठीक नहीं है. याद रखें, इजहार का मकसद हां सुनना नहीं, बल्कि अपनी भावना सच्चाई से बताना है. 

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