... तो इस तरह से महिलाओं को फायदा पहुंचा सकती है वाइन!
इससे पहले 2006 में भी रेड वाइन से जुड़ी कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आईं थीं. रिपोर्ट का दावा था कि रेसवेरेट्रॉल शरीर में पाए जाने वाले एसआईआरटी 1 एन्जाइम (जो कि उम्र को बढ़ने से रोकता है) को एक्टिवेट कर देता है.शोधकर्ताओं ने पाया कि रेड वाइन के इस्तेमाल से चूहों की लाइफ बढ़ गई. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि इसके इस्तेमाल से कैंसर और डाइबिटीज जैसी बीमारियों से भी छुटकारा पाया जा सकता है.
मार्केट में एंटीऑक्सीडेंट रेसवेरेट्रॉल की दवाएं (जो कि रेग्युलेटरी अथॉरिटी से अप्रूव नहीं हैं) भी उपलब्ध हैं लेकिन इसके साथ भी एक समस्या है. दरअसल जब भी कोई ऐसी दवाएं खाता है तो लीवर दवा में रेसवेरेट्रॉल को फिल्टर करके बहुत ही कम मात्रा में शरीर के बाकी हिस्सों तक जाने देता है, यानि रेसवेरेट्रॉल की अधिक मात्रा के लिए आपको ढेर सारी दवाएं खानी होंगी. लेकिन रेसवेरेट्रॉल के अत्यधिक प्रयोग से आंत की बीमारियां होने का खतरा रहता है.
पोलैंड और कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने रिसर्च के बाद यह दावा किया है कि रेड वाइन में पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट रेसवेरेट्रॉल (जो कि लाल अंगूर के छिलकों में भी पाया जाता है) महिलाओं में पीसीओएस (पॉलिसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम) से निजात दिलाने में फायदेमंद है. इतना ही नहीं, महिलाओं में वजन बढ़ने की समस्या, अनचाहे बालों और बांझपन जैसी समस्याओं में भी रेड वाइन फायदेमंद होती है.लेकिन रेड वाइन के साथ एक समस्या ये भी है कि इसमें रेसवेरेट्रॉल की मात्रा बहुत ही कम होती है, इसका मतलब ये है कि आपको थोड़े से रेसवेरेट्रॉल के लिए सैकड़ों बोतल रेड वाइन पीनी होगी.
वैसे तो एल्कोहल सभी को नुकसान देती है खासतौर पर महिलाओं को, क्योंकि इससे महिलाओं की गर्भधारण की क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है. लेकिन हाल ही में आई रिपोर्ट कुछ और ही कहती है. रिपोर्ट के मुताबिक, रेड वाइन पीने से महिलाओं में गर्भधारण की क्षमता बढ़ती है साथ ही पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं में भी कमी आती है.