How To Deal With Stress After Exam Results: बिहार बोर्ड का रिजल्ट आज जारी होने जा रहा है और इसके बाद दूसरे बोर्ड्स के नतीजे भी सामने आएंगे. ऐसे समय में सबसे ज्यादा दबाव छात्रों पर ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों पर भी होता है. रिजल्ट का इंतजार, अच्छे नंबर की उम्मीद और भविष्य की चिंता, ये सब मिलकर बच्चों के मन में तनाव बढ़ा देते हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि रिजल्ट जिंदगी का सिर्फ एक हिस्सा है, पूरी कहानी नहीं. चलिए आपको बताते हैं कि इस स्थिति से निपटने के लिए छात्रों को क्या करना चाहिए और पैरेंट्स का व्यवहार कैसा होना चाहिए. 

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट

HT से बातचीत में VIBGYOR ग्रुप ऑफ स्कूल्स की सीनियर स्पेशल एजुकेटर नंदिता धर ने बताया कि रिजल्ट आने के बाद छात्रों के मन में राहत, घबराहट और अनिश्चितता जैसे कई भाव एक साथ आते है. ऐसे में भावनात्मक मजबूत  बहुत जरूरी होती है, ताकि बच्चा इस दौर को संभाल सके. रिजल्ट के बाद सबसे जरूरी है अपनी भावनाओं को समझना और उन्हें स्वीकार करना. अगर नंबर उम्मीद के मुताबिक नहीं आए, तो खुद को दोष देने या दबाव में आने के बजाय थोड़ा समय दें. यह भी याद रखें कि मार्क्स आपकी काबिलियत की पूरी पहचान नहीं होते. आपकी मेहनत, आपकी सोच और सीखने की इच्छा ज्यादा मायने रखती है. 

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तुलना करने से बचें

अक्सर बच्चे दूसरों से तुलना करने लगते हैं, खासकर दोस्तों या सोशल मीडिया पर दिख रहे रिजल्ट्स से. यही तुलना तनाव को और बढ़ा देती है। इसलिए जरूरी है कि हर छात्र अपनी यात्रा को समझे और खुद पर फोकस करे. अगर कुछ गलत हुआ है, तो उसे पछतावे की तरह नहीं, सीख के रूप में देखें.

खुलकर बातचीत करने की जरूरत

ऐसे समय में खुलकर बात करना भी बहुत जरूरी होता है.  माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से अपने मन की बात साझा करने से मन हल्का होता है और स्थिति को समझने में मदद मिलती है. इसके साथ ही, अपनी दिनचर्या को संतुलित रखना, जैसे अच्छी नींद लेना, हल्का व्यायाम करना और पसंदीदा गतिविधियों में समय देना, मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाए रखता है.

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माता पिता को क्या करना चाहिए

अब बात माता-पिता की भूमिका की. रिजल्ट चाहे जैसा भी हो, बच्चों के लिए सबसे जरूरी होता है उनका सपोर्ट सिस्टम. ऐसे में माता-पिता को शांत रहना चाहिए. गुस्सा या निराशा दिखाने से बच्चे का आत्मविश्वास और गिर सकता है. इसके बजाय उन्हें यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि उनके नंबर उनकी पहचान नहीं हैं. 

बच्चे की मेहनत की तारीफ

माता-पिता को बच्चों की मेहनत की तारीफ करनी चाहिए, सिर्फ नंबरों पर ध्यान नहीं देना चाहिए. तुलना करने से बचना चाहिए, क्योंकि हर बच्चे की क्षमता अलग होती है. सबसे अहम है बच्चों की बात सुनना कि उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें बिना जज किए स्वीकार करना. रिजल्ट के बाद का समय सिर्फ गलती ढूंढने का नहीं, बल्कि आगे की दिशा तय करने का होना चाहिए. बच्चों के साथ बैठकर उनके अगले कदमों पर बात करें कहां सुधार की जरूरत है और कैसे आगे बढ़ा जा सकता है.

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