How Parents Unknowingly Kill A Child’s Curiosity: बच्चों की दुनिया सवालों से भरी होती है. उनके लिए हर चीज नई होती है, हर अनुभव अलग होता है और हर छोटी-बड़ी बात को समझने की इच्छा उनके मन में होती है. यही जिज्ञासा उन्हें सीखने, सोचने और नई चीजों को खोजने के लिए प्रेरित करती है. लेकिन कई बार माता-पिता अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो बच्चों की इस स्वाभाविक जिज्ञासा को धीरे-धीरे कम कर सकती हैं.

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यह जरूरी नहीं कि ऐसा जानबूझकर किया जाए, लेकिन इसका असर बच्चे के आत्मविश्वास, सोचने की क्षमता और सीखने की इच्छा पर पड़ सकता है. आइए जानते हैं ऐसी चार आम आदतों के बारे में, जिनसे बच्चों की जिज्ञासा प्रभावित हो सकती है और उनकी जगह बेहतर प्रतिक्रिया क्या हो सकती है.

"क्योंकि मैंने कहा है" कहकर सवालों को टाल देना

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बच्चे अक्सर हर बात का कारण जानना चाहते हैं. जब वे पूछते हैं कि हम वहां क्यों नहीं जा सकते? तो कई बार माता-पिता जल्दी में जवाब देते हैं कि क्योंकि मैंने कहा है.  हालांकि कुछ परिस्थितियों में बच्चों को बिना बहस के बात माननी पड़ती है, लेकिन हर सवाल को इस तरह टालना उनकी जिज्ञासा को कमजोर कर सकता है. बेहतर होगा कि उन्हें छोटा और सरल कारण बताया जाएय. जैसे कि हम वहां नहीं जा सकते क्योंकि वह जगह अभी सुरक्षित नहीं है. इससे बच्चे समझते हैं कि उनके सवालों की अहमियत है.

बच्चों के अजीब सवालों पर हंसना

कई बार बच्चे ऐसे सवाल पूछते हैं जो बड़ों को मजाकिया लग सकते हैं. जैसे कि क्या मछलियों को प्यास लगती है? ऐसे सवाल वास्तव में उनकी कल्पनाशक्ति और सोचने की क्षमता को दर्शाते हैं. अगर माता-पिता बार-बार इन सवालों पर हंसते हैं या उन्हें बेवकूफी भरा बताते हैं, तो बच्चा भविष्य में सवाल पूछने से झिझक सकता है. इसकी बजाय यह कहना बेहतर है कि यहह तो बहुत दिलचस्प सवाल है. ऐसा करने से बच्चे को अपने विचार साझा करने का आत्मविश्वास मिलता है.

हर सवाल को लंबा लेक्चर बना देना

कई बार बच्चे सिर्फ एक साधारण सवाल पूछते हैं, लेकिन जवाब में उन्हें पूरा भाषण सुनना पड़ता है. उदाहरण के लिए बारिश क्यों होती है? के जवाब में पूरा विज्ञान पढ़ाना जरूरी नहीं है. बच्चों को बातचीत में शामिल करना ज्यादा प्रभावी होता है. आप उनसे पूछ सकते हैं कि तुम्हें क्या लगता है? इससे उनकी सोचने और तर्क करने की क्षमता विकसित होती है और सीखना भी रोचक बना रहता है.

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शौक को समय की बर्बादी समझना

चित्र बनाना, कहानियां गढ़ना, चीजें जोड़ना या अलग-अलग वस्तुएं इकट्ठा करना बच्चों के शौक हो सकते हैं. कई बार माता-पिता इन्हें पढ़ाई से ध्यान भटकाने वाली गतिविधियां मान लेते हैं. जबकि यही शौक बच्चे की रचनात्मकता और रुचियों की पहचान कराते हैं. यदि बार-बार इन्हें महत्वहीन बताया जाए तो बच्चा अपनी रुचियों से दूर हो सकता है. बेहतर होगा कि माता-पिता उनसे पूछें कि तुमने क्या बनाया? या इसके बारे में बताओ.  इससे बच्चे को महसूस होता है कि उसकी मेहनत और कल्पनाशक्ति की कद्र की जा रही है.

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