When To Replace Mop: घर की सफाई के लिए हम रोज पोछा लगाते हैं, ताकि फर्श साफ और चमकदार दिखे. लेकिन बहुत कम लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि यही पोछा कुछ समय बाद खुद गंदगी और कीटाणुओं का घर बन जाता है. हम सोचते हैं कि पोछा लगाने से फर्श साफ हो रहा है, लेकिन अगर पोछा खुद गंदा है तो वह सफाई की जगह बीमारियां फैलाने का काम करता है. पोछे का कपड़ा नमी सोखता है और नमी में बैक्टीरिया बहुत तेजी से बढ़ते हैं.

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जब हम पोछे को गीला करके फर्श पर घुमाते हैं और फिर उसे बिना ठीक से सुखाए एक कोने में रख देते हैं, तो उसमें बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि गीले पोछे में हजारों की संख्या में बैक्टीरिया कुछ ही घंटों में बढ़ सकते हैं. यही कारण है कि पुराना या ठीक से न सुखाया गया पोछा फर्श को साफ करने की बजाय कीटाणु और फैला देता है. 

कितने समय बाद बदल देना चाहिए पोछा?

सामान्य तौर पर घर में इस्तेमाल होने वाले पोछे को हर एक से दो महीने में बदल देना चाहिए. अगर घर में बच्चे, बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति हैं, तो सफाई से जुड़े खतरे ज्यादा होते हैं, इसलिए ऐसे घरों में पोछा एक महीने के अंदर बदलना बेहतर माना जाता है.  अगर पोछे का कपड़ा घिसने लगे, उसमें से बदबू आने लगे, उसका रंग बदल जाए या धोने के बाद भी वह साफ न लगे, तो यह इस बात का संकेत है कि अब पोछा बदलने का समय आ गया है, भले ही एक महीना पूरा न हुआ हो. 

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पोछे की सही सफाई और रखरखाव का तरीका

पोछे को बार-बार बदलना ही काफी नहीं है, बल्कि रोजाना सही तरीके से उसकी सफाई करना भी उतना ही जरूरी है. पोछा लगाने के बाद उसे साफ पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए, ताकि उसमें मिट्टी और साबुन का असर न रह जाए. हफ्ते में एक या दो बार पोछे को हल्के गर्म पानी में डिटर्जेंट या फिनाइल डालकर भिगोना चाहिए, इससे उसमें छिपे बैक्टीरिया काफी हद तक खत्म हो जाते हैं.  सबसे जरूरी बात यह है कि पोछे को धोने के बाद धूप में सुखाना चाहिए, क्योंकि सूरज की रोशनी में मौजूद प्राकृतिक तत्व कीटाणुओं को खत्म करने में मदद करते हैं. बंद कमरे या नमी वाली जगह पर पोछे को सुखाने से बैक्टीरिया और तेजी से बढ़ते हैं. 

गंदे पोछे से बढ़ सकता है इन बीमारियों का खतरा

अगर पोछे की सफाई और उसे बदलने में लापरवाही की जाए, तो इससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. गंदे पोछे में मौजूद बैक्टीरिया जैसे ई-कोलाई और साल्मोनेला फर्श पर फैल सकते हैं, जिससे पेट में इन्फेक्शन, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं. नमी और फंगस से भरा पोछा सांस से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ा सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से एलर्जी या अस्थमा की शिकायत है. इसके अलावा अगर घर में कोई घाव या कटा हुआ पैर लेकर गंदे फर्श पर चलता है, तो त्वचा में इन्फेक्शन होने का खतरा भी रहता है. छोटे बच्चे फर्श पर ज्यादा समय बिताते हैं और अक्सर हाथ मुंह में डालते हैं, इसलिए उन पर इसका असर जल्दी और ज्यादा पड़ता है. 

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