शरीर में दर्द, चोट या किसी बीमारी का कारण पता लगाने के लिए डॉक्टर एक्स-रे, सीटी स्कैन या MRI कराने की सलाह देते हैं. इन तीनों जांचों से शरीर के अंदर की तस्वीरें मिलती हैं, लेकिन इनका काम अलग-अलग होता है. एक्स-रे हड्डियों की जांच में मदद करता है, सीटी स्कैन शरीर के अंदर की विस्तृत तस्वीरें देता है, जबकि MRI दिमाग, रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियों जैसे सॉफ्ट टिश्यू की जांच के लिए उपयोग की जाती है आइए जानते हैं कि इन तीनों टेस्ट में क्या अंतर है.

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एक्स-रे क्या है और कब किया जाता है ?

एक्स-रे एक सामान्य जांच है, जिसमें कम मात्रा में रेडिएशन की मदद से शरीर के अंदर की तस्वीर बनाई जाती है. हड्डियां साफ दिखाई देने के कारण फ्रैक्चर या चोट की आशंका होने पर यह टेस्ट किया जाता है. इसके अलावा, फेफड़ों की कुछ समस्याओं की जांच के लिए चेस्ट एक्स-रे भी किया जाता है. यह जांच आमतौर पर जल्दी पूरी हो जाती है, लेकिन इससे शरीर के सभी अंगों की विस्तृत जानकारी नहीं मिलती.

सीटी स्कैन क्या है और कब जरूरी होता है ?

सीटी स्कैन का पूरा नाम कंप्यूटेड टोमोग्राफी है. इसमें एक्स-रे की मदद से शरीर के अलग-अलग कोणों से तस्वीरें ली जाती हैं और कंप्यूटर उन्हें जोड़कर विस्तृत चित्र तैयार करता है.दुर्घटना में गंभीर चोट, सिर में चोट, अंदरूनी रक्तस्राव और कुछ अंगों की बीमारियों की जांच के लिए सीटी स्कैन किया जाता है. इमरजेंसी में यह कम समय में जरूरी जानकारी देने में मदद करता है. 

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MRI क्या है और इसका इस्तेमाल कब होता है ?

MRI का पूरा नाम मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग है. इसमें तेज चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों से शरीर के अंदर की तस्वीरें बनाई जाती हैं. इसमें एक्स-रे वाले रेडिएशन का इस्तेमाल नहीं होता. दिमाग, रीढ़ की हड्डी, मांसपेशियों, घुटनों के लिगामेंट और दूसरे सॉफ्ट टिश्यू की जांच के लिए MRI उपयोगी है. इसमें सीटी स्कैन की तुलना में अधिक समय लगता है. 

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कौन-सा टेस्ट बेहतर है ?

एक्स-रे, सीटी स्कैन और MRI में से कोई एक जांच हर बीमारी के लिए बेहतर नहीं होती. एक्स-रे हड्डियों की शुरुआती जांच में उपयोगी है, सीटी स्कैन गंभीर चोटों और अंदरूनी समस्याओं का पता लगाने में मदद करता है, जबकि MRI सॉफ्ट टिश्यू की बारीक जानकारी देती है. जांच का चुनाव मरीज के लक्षणों और मेडिकल स्थिति के आधार पर किया जाता है. इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना खुद से किसी टेस्ट का चुनाव न करें. अगर गर्भावस्था की आशंका है या शरीर में कोई मेडिकल डिवाइस लगा है, तो जांच से पहले डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर दें.

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