अभिनेता नाना पाटेकर की गुरुवार को कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई. कार्डियक अरेस्ट आने के बाद नाना को करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया गया, इसके बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. इस खबर ने सीपीआर देने के तरीके और इससे बवाव पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. 

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बता दें, कार्डियक अरेस्ट एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें दिल अचानक खून पंप करना बंद कर देता है. ऐसी स्थिति में कुछ ही मिनटों के भीतर मदद मिलना बेहद जरूरी होता है. सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन एक जीवनरक्षक प्रक्रिया है, जो अस्पताल पहुंचने तक शरीर में खून का प्रवाह बनाए रखने में मदद करती है, लेकिन इसे सही समय पर और सही तरीके से देना जरूरी है.

कब देना चाहिए सीपीआर?

हाल ही में अभिनेता नाना पाटेकर से जुड़ी कार्डियक अरेस्ट की खबर के बाद इस बात को समझना जरूरी है कि ऐसी स्थिति में शुरुआती मदद कितनी अहम होती है. कार्डियक अरेस्ट के दौरान व्यक्ति अचानक गिर सकता है, बेहोश हो सकता है और उसकी सांस सामान्य रूप से चलना बंद हो जाती है. अगर कोई व्यक्ति आवाज देने और कंधे पर हल्के से थपथपाने के बाद भी प्रतिक्रिया नहीं देता और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है, तो तुरंत आपातकालीन मदद बुलाएं और सीपीआर शुरू करें. कभी-कभी व्यक्ति केवल हांफता हुआ दिखाई देता है. ऐसी असामान्य सांस को सामान्य सांस समझकर इंतजार नहीं करना चाहिए. 

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क्या है सीपीआर देने का सही तरीका?

अगर कोई वयस्क अचानक बेहोश हो जाए और सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो, तो ये कदम उठाएं. सबसे पहले सुनिश्चित करें कि आसपास कोई खतरा नहीं है. व्यक्ति को आवाज दें और कंधे पर हल्के से थपथपाएं, किसी को आपातकालीन सेवा पर फोन करने के लिए कहें, व्यक्ति को पीठ के बल किसी सख्त और समतल सतह पर लिटाएं. छाती के बीचोंबीच एक हथेली का निचला हिस्सा रखें और दूसरी हथेली उसके ऊपर रखें. छाती को लगभग 5 से 6 सेंटीमीटर नीचे दबाएं. एक मिनट में 100 से 120 बार दबाव देने की गति बनाए रखें. हर दबाव के बाद छाती को सामान्य स्थिति में लौटने दें. जब तक व्यक्ति सामान्य रूप से सांस लेने या प्रतिक्रिया देने न लगे, प्रशिक्षित मदद न पहुंच जाए या आप शारीरिक रूप से जारी रखने में असमर्थ न हों, तब तक सीपीआर जारी रखें. यदि एईडी उपलब्ध हो, तो उसे चालू करके उसके निर्देशों का पालन करें. सीपीआर का प्रशिक्षण लेने वाले लोग जरूरत के अनुसार छाती पर दबाव और बचाव वाली सांसें भी देते हैं. प्रशिक्षण नहीं होने पर वयस्क के अचानक गिरने की स्थिति में केवल छाती पर दबाव देने वाला सीपीआर मददगार विकल्प है.

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कब नहीं देना चाहिए सीपीआर?

हर बेहोश व्यक्ति को सीपीआर की जरूरत नहीं होती. यदि व्यक्ति बेहोश है, लेकिन सामान्य रूप से सांस ले रहा है, तो छाती पर दबाव न दें. तुरंत मेडिकल सहायता बुलाएं, सांस पर नजर रखें और जरूरत के अनुसार उसे सुरक्षित करवट वाली स्थिति में रखें. चोट लगने की आशंका हो, तो अनावश्यक रूप से शरीर न घुमाएं. यदि व्यक्ति होश में है या सामान्य रूप से सांस ले रहा है, तो सीपीआर शुरू न करें. इसके बजाय उसकी स्थिति का आकलन करें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता लें. ध्यान रखें कि सीपीआर देने से हर व्यक्ति की जान बचने की गारंटी नहीं होती. लेकिन कार्डियक अरेस्ट में मदद करने में देरी करना जानलेवा साबित हो सकता है. इसलिए सीपीआर का प्रशिक्षण लेना और ऐसी  स्थिति में तुरंत कदम उठाना बेहद जरूरी है.

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