Seasonal Diseases Prevention Tips: अगस्त का महीना अपने अंतिम पड़ाव पर है और मौसम में भी काफी बदलाव देखने को मिल रहा है. हालांकि इस बार अगस्त में उस तरह की बारिश (Rain) देखने को नहीं मिली है, जिसके लिए अगस्त (August Month) का महीना जाना जाता है. ये ग्लोबल वॉर्मिंग (Global warming) का ही असर है कि राजस्थान जैसे राज्य में जमकर बरसात हो रही है और अच्छी बारिश के लिए पहचान रखने वाले राज्य रिमझिम फुहारों के लिए तरस रहे हैं जबकि कई राज्यों में भयानक बाढ़ आई हुई है. हम यहां आपको मौसम का हाल नहीं बता रहे हैं बल्कि मौसम जब इस तरह का मिजाज दिखाता है तो इससे होने वाले बदलावों के कारण किस तरह के रोग (Seasonal Disease) फैलते हैं और इनसे कैसे सुरक्षित (Health Tips for August) रहा जा सकता है. यहां इस बारे में आपको जानकारी दी जा रही है ( Health Tips For September) .


अगस्त में फैलने वाले रोग 


जुलाई से शुरू होकर अगस्त और फिर मिड सितंबर तक मॉनसून के कारण होने वाले रोग बहुत तेजी से फैलते हैं. इनमें मुख्य रोग इस प्रकार हैं...



  • डेंगू

  • मलेरिया

  • वायरल फीवर

  • इंफ्लूएंजा

  • फ्लू

  • डायरिया

  • हैजा

  • चिकुनगुनिया

  • पीलिया


जुलाई-अगस्त-सितंबर में क्यों फैलते हैं ये रोग?
यहां जितने भी रोगों का नाम बताया गया है, इनमें से कुछ मच्छरों के कारण फैलते हैं और कुछ दूषित पानी या संक्रमित भोजन के कारण फैलते हैं. बारिश मौसम वैसे तो मुख्य रूप से जुलाई और अगस्त होता है. लेकिन इसका असर सितंबर तक रहता है. कभी उमस, कभी बारिश, कभी तेज धूप और कभी ठंडी हवाएं. इस तरह का बदलाव जब मौसम में होता रहता है तो बीच-बीच में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है. साथ में वातावरण में बैक्टीरिया की ग्रोथ तेजी से होती है.


यही बैक्टीरियल ग्रोथ भोजन के संक्रमित होने का कारण बन जाती है. जबकि खराब ड्रेनेज सिस्टम, लापरवाही और पानी की लाइन में टूट-फूट के कारण यदि किसी भी वजह से पानी संक्रमित हो जाता है तो पीलिया यानी जॉइंडिस का रोग होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है.


अगस्त की बीमारियों से बचाव के उपाय



  • मच्छरों से बचाव करें. इसके लिए कॉटन के फुल स्लीव्स के कपड़े अधिक पहनें

  • घरे के आस-पास पानी ना जमा होने दें. फूलदान इत्यादि का पानी हर दिन बदलें और जहां पानी भरा रहता है, उसे साफ करा दें. जब तक क्लीनिंग ना हो तब तक उस पानी में कैरोसीन यानी मिट्टी का तेल डालते रहें. इससे मच्छर नहीं पनपेंगे.

  • मॉस्किटो रेपेलेंट का उपयोग करें. जैसे, शरीर पर लगाने के लिए मच्छर भगाने वाली कोई क्रीम या घर में जलाने वाले लिक्विड और क्वाइल इत्यादि.

  • बासी भोजन ना खाएं. खाना बने हुए दो घंटे से अधिक का समय हो जाए तो इसे अच्छी तरह गर्म करके ही उपयोग में लें.

  • पीने के पानी की क्वालिटी का ध्यान रखें. यह दूषित या संक्रमित नहीं होना चाहिए.


सितंबर से बढ़ जाता है इन रोगों का खतरा


सितंबर के मध्य तक यहां बताई गई बीमारियों का प्रकोप अधिक रहता है. इसके बाद इन रोगों से ग्रसित मरीजों की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगती है. लेकिन अन्य बीमारियों के रोगी बढ़ने लगते हैं, जिनमें मेंटल हेल्थ से ग्रसित रोगियों की संख्या अच्छी-खासी होती है. ऐसा सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) के कारण होता है. 


जैसा कि इस रोग के नाम से ही क्लियर है कि यह मानसिक समस्या मौसम में हो रहे बदलाव के कारण होने लगती है. सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर मानसिक रोग डिप्रेशन यानी अवसाद का ही एक रूप है. बारिश के बाद जब मौसम में बदलाव होता है और धीरे-धीरे सर्दियों का मौसम शुरू हो रहा होता है, तब सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर के रोगियों की संख्या हर साल बढ़ जाती है. इन रोगियों में ये लक्षण नजर आते हैं...



  • मूड स्विंग्स की समस्या बढ़ना

  • ऊर्जा की कमी महसूस करना

  • बहुत जल्दी थक जाना

  • बिना किसी कारण रोने की इच्छा होना

  • किसी काम में मन ना लगना

  • किसी से बात करने की इच्छा ना होना

  • बहुत अधिक नींद आना

  • बहुत अधिक भूख लगना 

  • हर समय निराश और उदास फील करना

  • जीने की इच्छा खत्म होना


इन सभी समस्याओं को लंबे समय तक अनदेखा करने से आपकी सेहत, आपके करियर और आपके रिश्तों पर बुरा असर पड़ता है. इसलिए जब भी कभी इस तरह की कोई समस्या लगे तो तुरंत किसी अच्छे सायकाइट्रिस्ट से संपर्क करें.


Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों को केवल सुझाव के रूप में लें, एबीपी न्यूज़ इनकी पुष्टि नहीं करता है. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. 


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