सिगरेट पीने से शरीर को कई तरह के नुकसान होते हैं और लंग कैंसर का खतरा भी बढ़ता जाता है. अच्छी बात यह है कि स्मोकिंग छोड़ने के बाद शरीर में सुधार की प्रक्रिया शुरू होने लगती है. इसका फायदा कुछ दिनों में ही दिखने लगता है, जबकि कैंसर का खतरा कम होने में कई साल लगते हैं. एक शोध के अनुसार, स्मोकिंग छोड़ने के 10 से 15 साल के बाद लंग कैंसर का अतिरिक्त खतरा करीब आधा हो जाता है. जितनी जल्दी स्मोकिंग छोड़ी जाती है, उतना ही स्वास्थ्य को फायदा मिलता है.

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स्मोकिंग छोड़ने के बाद कब क्या बदलाव होता है?

सिगरेट छोड़ते ही शरीर में बदलाव शुरू हो जाते हैं. कुछ दिनों में खून में निकोटीन का स्तर शून्य तक पहुंच जाता है और कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर सामान्य होने लगता है. 1 से 12 महीने के अंदर खांसी और सांस फूलने जैसी समस्याएं कम होने लगती हैं. 1 से 2 साल में हार्ट अटैक का खतरा काफी कम होता है. वहीं 5 से 10 साल के दौरान मुंह, गले और वॉयस बॉक्स के कैंसर का अतिरिक्त खतरा करीब आधा हो जाता है.

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10 से 15 साल में आधा हो जाता है लंग कैंसर का खतरा

लंग कैंसर के मामले में समय के साथ जोखिम कम होता रहता है. शोध  के अनुसार, स्मोकिंग छोड़ने के 10 से 15 साल बाद लंग कैंसर का अतिरिक्त खतरा उन लोगों की तुलना में करीब आधा हो जाता है, जो लगातार स्मोकिंग करते रहते हैं. साथ ही अमेरिकन कैंसर सोसायटी भी बताती है कि 10 से 15 साल बाद लंग कैंसर होने का जोखिम लगातार स्मोकिंग करने वालों की तुलना में करीब 50 प्रतिशत कम हो जाती है. इसका मतलब यह नहीं है कि 15 साल बाद खतरा बिल्कुल खत्म हो जाता है. लंबे समय तक स्मोकिंग करने वाले लोगों में जोखिम आगे भी बना रह सकता है और समय के साथ कम होता रहता है.

जितनी जल्दी छोड़ेंगे, उतना ज्यादा फायदा

स्मोकिंग छोड़ने की कोई सही उम्र तय नहीं है. व्यक्ति ने कितने साल स्मोकिंग की है या उसकी उम्र कितनी है, इसके बावजूद स्मोकिंग छोड़ने से स्वास्थ्य को फायदा मिलता है. स्मोकिंग बंद करने पर फेफड़ों को हुए कुछ नुकसान की मरम्मत की प्रक्रिया शुरू होती है और लंग कैंसर का जोखिम कम होता है. हालांकि, लंग कैंसर का खतरा सिर्फ स्मोकिंग से तय नहीं होता. सेकेंडहैंड स्मोक, वायु प्रदूषण, रेडॉन और कुछ कार्यस्थल पर मौजूद हानिकारक पदार्थ भी जोखिम बढ़ा सकते हैं. इसलिए स्मोकिंग छोड़ना फेफड़ों की सेहत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है 

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